आज़ादी अच्छी चीज है और सभी को अच्छी लगती है। किन्तु आज़ादी का विस्तार खुले आसमान की तरह है जिसकी कोई सीमायें नहीं होतीं। ऐसे में यदि हम अपना चरित्र विशेष बनाये रखना चाहते हैं तब हमें अपनी आज़ादी की सीमायें स्वयं निर्धारित करनी होंगी और उन सीमाओं पर होने वाले अतिक्रमण को रोकना होगा।