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Tuesday, November 7, 2017

आज़ादी की सीमायें : FREEDOM BOUNDARIES

मित्रो !
            Freedom is a good thing and we all love it. But it's domain is like open sky which has no limits. If we want to maintain and preserve our specific character, we, ourselves, will have to fix limits of our freedom and thereafter, we will have to protect those limits from our own encroachment and external aggression.

      आज़ादी अच्छी चीज है और सभी को अच्छी लगती है। किन्तु आज़ादी का विस्तार खुले आसमान की तरह है जिसकी कोई सीमायें नहीं होतीं। ऐसे में यदि हम अपना चरित्र विशेष बनाये रखना चाहते हैं तब हमें अपनी आज़ादी की सीमायें स्वयं निर्धारित करनी होंगी और उन सीमाओं की हमें स्वयं के अतिक्रमण और बाह्य आक्रमण से रक्षा करनी होगी।

Sunday, November 20, 2016

निराशा, चिंता या तनाव से मुक्ति : Freedom from Despair, Worry or Tension

मित्रो !
निराशा, चिंता या तनाव से ग्रसित होने पर हमारा मष्तिष्क सामान्य स्थिति में कार्य नहीं करता और इस कारण हम कोई कार्य सुचारू रूप से नहीं कर पाते। इनसे स्वास्थ्य हानि भी होती है। इनसे जितनी जल्दी छुटकारा पा लिया जाय उतना ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
जो लोग ईश्वर में आस्था रखते हैं उनको निराशा, तनाव और चिन्ताएं नहीं सतातीं। आस्थावान व्यक्ति निराशा, चिंता या तनाव से ग्रस्त होने पर ईश्वर को याद कर यह सोच कर कि ईश्वर सब ठीक करेगा निश्चिन्त हो जाता है। ऐसा होने पर वह निराशा, चिंता और तनाव से मुक्त हो जाता है।



Sunday, October 2, 2016

निराशा और तनाव से मुक्ति : Freedom from Frustration and Tension


  • मित्रो !
    निराश या तनाव ग्रस्त होने पर जब कोई रास्ता न सूझ रहा हो तब सब कुछ ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से चित्त शीघ्र शान्त हो जाता है। 
    व्यवहारिक जीवन में इसे उपयोग में लाया जा सकता है। यह विचार अत्यंत उपयोगी है। ईश्वर में विश्वास रखने का यह एक बड़ा लाभ है।

Sunday, May 15, 2016

कर्मों का समर्पण

मित्रो !
     यदि तुम्हें ईश्वर में विश्वास है तब अपना प्रत्येक कर्म ईश्वर को समर्पित करते हुए करो। ऐसा करके तुम कर्म-फल के बंधन से मुक्त हो जाओगे और प्रतिकूल कर्म-फल मिलने पर भी तुम विचलित नहीं होगे।

     If you have faith in God then while performing any act, dedicate it to God. By doing so you'll be free from the bondage of karma-fruit and then even if the outcome of karma is unfavourable, you will not be deterred by it.








Monday, July 27, 2015

सकल पदारथ हैं जग माहीं


मित्रो !

      ईश्वर ने हमारे लिए इस जगत और जगत में विभिन्न प्रकार के संसाधनों तथा कर्मों की रचना की है। उसने संसाधनों के उपयोग के लिए ज्ञान की रचना की है। कर्मों के चयन और कर्म करने की हमें स्वतंत्रता दी है। हम में से जो कर्मठ है वह ज्ञान अर्जित कर संसाधनों के सदुपयोग से सुख पा रहा है, जो अज्ञानी है वह कर्महीन रहकर या संसाधनों का दुरुपयोग कर दुःख भोग रहा है। 

     गोस्वामी तुलसीदास जी ने उचित ही रचना की है "सकल पदारथ हैं जग माहीं, कर्महीन नर पावत नाहीं। हमें चाहिए कि हम ईश्वर का दिया हुआ ज्ञान अर्जित करें, उचित कर्मों का चयन करें और ईश्वर प्रदत्त संसाधनों का सही प्रयोग कर उचित कर्म करते हुए सुखमय जीवन जियें, हमें जगत में लाने के लिए और इतना सब कुछ देनें के लिए उस परम पिता का गुण गान कर उसका धन्यवाद करें।



Monday, March 30, 2015

दुःख हमारी अपनी देन हैं

मित्रो !

    मनुष्य अज्ञानी रह कर अनियंत्रित जीवन शैली जीते हुए असीमित आज़ादी का उपभोग कर अपने कष्टों को स्वयं बढ़ाता है। यदि मनुष्य सुखी रहना चाहता है तब उसे ज्ञान अर्जित करना होगा, जीवन नौका को अनियंत्रित न छोड़कर स्वयं नियंत्रित कर सही दिशा में ले जाना होगा तथा उसे असीमित आज़ादी में से उतनी आज़ादी का उपभोग करना होगा जितना उसके और अन्य सभी के लिए हितकर हो सकता है।


Friday, November 7, 2014

आज़ादी : Freedom

      आज़ादी अच्छी चीज है और सभी को अच्छी लगती है। किन्तु आज़ादी का विस्तार खुले आसमान की तरह है जिसकी कोई सीमायें नहीं होतीं। ऐसे में यदि हम अपना चरित्र विशेष बनाये रखना चाहते हैं तब हमें अपनी आज़ादी की सीमायें स्वयं निर्धारित करनी होंगी और उन सीमाओं पर होने वाले अतिक्रमण को रोकना होगा।