Showing posts with label Ignorant. Show all posts
Showing posts with label Ignorant. Show all posts

Tuesday, August 9, 2016

कितना एहसान फरामोश है आदमी : HOW UNGRATEFUL THE MAN IS

मित्रो !
        कितने अज्ञानी हैं हम। जब कोई हम पर कोई छोटा सा भी उपकार करता है तब हम उसका तो शुक्रिया अदा करते हैं किन्तु हम उस सर्वशक्तिमान का शुक्रिया अदा नहीं करते जिसने हमें सब-कुछ दिया है और जिसकी कृपा पर हम जिन्दा हैं। हमारी हर सांस जिसकी कृपा पर निर्भर है हम उसी को भुला बैठे हैं।

       How ignorant we are. When somebody does a small favor to us we thank him but we have forgotten to thank the almighty who has given us everything and on whose grace we are alive. We have forgotten Him on whose grace our every breath comes and goes.

Monday, August 8, 2016

How Ignorant We Are

Friends !
           How ignorant we are. When somebody does a small favor to us we thank him but we have forgotten to thank the almighty who has given us everything and on whose grace we are alive. We have forgotten Him on whose grace our every breath depends. Our every breath is indebted to Him.

Thursday, July 14, 2016

अज्ञानी कौन


मित्रो !

         जो व्यक्ति करने योग्य और न करने योग्य में अन्तर को नहीं जानता अथवा जो व्यक्ति करने योग्य और न करने योग्य में अन्तर को जानते हुए भी वह करता है जो करने योग्य नहीं है वे दोनों व्यक्ति अज्ञानी हैं।

           पहला व्यक्ति ज्ञान के अभाव में अज्ञानी है और दूसरा व्यक्ति इस कारण अज्ञानी है कि जो करने योग्य नहीं है वह वही किये जा रहा है। पहला अनपढ़ है तो दूसरा पढ़ा-लिखा अनपढ़ है।




Saturday, March 19, 2016

कितने अज्ञानी हैं हम HOW IGNORANT WE ARE

मित्रो !


     ईश्वर के प्रति श्रद्धा और भक्ति में डूबा हुआ मनुष्य ईश्वर के साथ प्रेम में बंध जाता है। नश्वर प्रेम में पुरुष स्त्री को और स्त्री पुरुष को अप्रिय लगने वाला कोई कार्य नहीं करते। किन्तु बिडम्बना यह है कि मनुष्य का ईश्वर के साथ अमर प्रेम होने पर भी वह ईश्वर को अप्रिय अनेक कार्य करता रहता है।


Monday, March 30, 2015

दुःख हमारी अपनी देन हैं

मित्रो !

    मनुष्य अज्ञानी रह कर अनियंत्रित जीवन शैली जीते हुए असीमित आज़ादी का उपभोग कर अपने कष्टों को स्वयं बढ़ाता है। यदि मनुष्य सुखी रहना चाहता है तब उसे ज्ञान अर्जित करना होगा, जीवन नौका को अनियंत्रित न छोड़कर स्वयं नियंत्रित कर सही दिशा में ले जाना होगा तथा उसे असीमित आज़ादी में से उतनी आज़ादी का उपभोग करना होगा जितना उसके और अन्य सभी के लिए हितकर हो सकता है।