Friday, March 25, 2016

अत्यधिक निष्क्रियता अत्यधिक हानिकारक : Excessive Inactivity Highly Damaging

मित्रो !

     शरीर या उसके अंगों को अत्यधिक विश्राम देने की आदत डाल लेने पर शरीर के जोड़ जकड जाते हैं और मांस पेशियाँ शिथिल पड़ जातीं हैं। ऐसी स्थिति में शरीर के अंगों की गति में बाधा आने लगती है और शरीर अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाता है। 
     हमें चाहिए कि हम शरीर और उसके हिस्सों को आवश्यकतानुसार ही विश्राम दें। शरीर के अंगों को क्रियाशील बनाए रखें। हमें ध्यान रखना चाहिए कि अस्वस्थ शरीर के रहते हम किसी सुख का अनुभव भी नहीं कर सकते, हमारी अन्य लोगों पर निर्भरता बढ़ जाती है और हम दूसरे लोगों की दया पर जीवन गुजारने को विवश हो जाते हैं। ऐसी स्थिति आये इससे पहले हमारे संभल जाने में ही बुद्धिमानी है।




Thursday, March 24, 2016

आवश्यकता स्वयं को जानने की : Need to Know Thyself

मित्रो !
   मनुष्य के शरीर के अन्दर असीमित शक्तियां विद्यमान हैं। आवश्यकता ऐसी शक्तियों के विषय में ज्ञान प्राप्त करने और उनका सदुपयोग करने की है। इसी में उसका अपना और जगत का कल्याण निहित है।


       प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी शक्ति को पहचाने।



सभी को मंगलमय हो होली

मित्रो !
     छोटे-बड़ों, सभी को होली त्यौहार की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मेरा अनुरोध है कि हम सब आपसी मतभेद भुलाकर जाति-पाँति, ऊँच-नीच, अमीरी-गरीबी, छोटे-बड़े, दोस्ती-दुश्मनी, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर सभी को निष्कपट भाव से गले लगायें। होली दिल से मनाएं।
     मेरा मानना है कि जो लोग ऐसा नहीं कर सकते उनके लिए होली का कोई महत्व नहीं है। बच्चों को रंगों से होली खेलने का हक़ है क्योंकि उनके दिल और दिमाग में किसी के लिए भेद-भाव नहीं होता, हम परिपक्व लोगों को चाहिए कि हम दिल से होली मनाएं।