Tuesday, May 22, 2018

Is Zero-Rated Supply a taxable supply?


Friends!
            Whether a Zero Rated Supply is a Taxable Supply, is an important question. For the reasons given hereunder, my personal opinion is that a zero-rated supply is not a taxable supply of goods or services or both for the purpose of goods and services tax (GST).
A.         Expression "taxable supply" has been defined in clause (108) of section 2 of the Central Goods and Services Tax Act, 2017 as follows:
'(108) “taxable supply” means a supply of goods or services or both which is leviable to tax under this Act;'
            This definition of expression "taxable supply" is also applicable to the provisions of the Integrated Goods and Services Tax Act, 2017 by virtue of clause (24) of section 2 of the said Act. It is to be noted that where any supply is leviable to any tax, such amount of tax is to be paid by the person specified in the tax levy provision of the Act.
B. In the draft of the Integrated Goods and Services Tax Act released on November 16, 2016, sub-section (1) of section 16 had run as follows:
16. Zero rated supply
"(1) “zero rated supply” means any of the following taxable supply of goods and/or services, namely -
(a) export of goods and/or services; or
(b) supply of goods and/or services to a SEZ developer or an SEZ unit."
            Here, after the word "following", expression "taxable supply of goods and/or services" had occurred. In the Integrated Goods and Services Tax Act, 2017, passed by the Parliament, sub-section (1) of section 16 of the said Act runs as follows:
"Zero rated supply.
16. (1) “Zero rated supply” means any of the following supplies of goods or services or both, namely:—
(a) export of goods or services or both; or
(b) supply of goods or services or both to a Special Economic Zone developer or a Special Economic Zone unit."
            Here we see that word "taxable", used in the draft, is missing. This is not an omission. The Goods and Services Tax Council, in its 12th meeting held on March 16, 2017, on suggestion from the Ministry of Commerce and Industry, Government of India, had taken a decision of including export supplies of alcoholic liquor for human consumption, crude oil, high speed diesel, motor spirit (commonly known as petrol), natural gas and aviation turbine fuel and supplies of such goods in zero rated supply. These are the goods on supply of which goods and services tax (GST) cannot be levied in view of provisions of the Constitution. Since, zero rated supplies include supply of such goods, therefore, in respect of a zero rated supply, it cannot be said that supply is leviable to tax.
C. Sub-section (2) of section 16 of the Integrated Goods and Services Tax Act, 2017 runs as follows:
"(2) Subject to the provisions of sub-section (5) of section 17 of the Central Goods and Services Tax Act, credit of input tax may be availed for making zero-rated supplies, notwithstanding that such supply may be an exempt supply."
            Here we notice that the sub-section (2) clarifies that benefit of input tax credit shall also be available in respect of exempt supplies. Definition of expression "exempt supply", provided in clause (47) of section 2 of the Central Goods and Services Tax Act, 2017 is also applicable to the provisions of the Integrated Goods and Services Tax Act, 2017. This definition runs as follows:
'(47) “exempt supply” means supply of any goods or services or both which attracts nil rate of tax or which may be wholly exempt from tax under section 11, or under section 6 of the Integrated Goods and Services Tax Act, and includes non-taxable supply;'
            Non-taxable supply is nothing but supply of goods on the supply of which goods and services tax (GST) cannot be levied. This also clarifies that zero-rated supply includes supplies on which GST cannot be levied.

D. On zero-rated supply, goods and services tax is not payable. This is clear from the FAQ issued by the Central Board of Excise and Customs (CBEC). Also, no person is paying goods and services tax (GST) on zero rated supply and Government is accepting returns without any objection. It is noteworthy that levy of tax creates liability, of payment of certain amount of tax, of some person specified in the tax levy provision of the Act. If in respect of an event no person is liable for payment of any money as tax, event (here supply of goods or services or both) cannot be said an event leviable to tax i.e. a taxable supply.
            In view of the discussion above, I am of the view that a zero rated supply is not a taxable supply but benefit of input tax credit is admissible in respect of inputs and input services used in making such supply.

Disclaimer: Readers of the post are advised that before using my views they should consult some expert on the subject. I disown any liability.



Wednesday, May 9, 2018

क्या आपने कभी सोचा है? Have You Ever Thought?



     जिससे आप प्यार करते हैं उसे आप अपने दिल में जगह देते हैं।  आप दावा करते हैं कि आप अपने देश से प्रेम करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आप के दिल में कौन रहता है, देश कितना बड़ा है और दिल में रहने वाले देश में क्या क्या है ?

Have You Ever Thought?

          You give place in your heart to whom you love. You claim that you love your country. Have you ever thought who resides in your heart and how big is the country which resides within your heart?

 

Wednesday, April 11, 2018

ईश्वर को कैसे करें प्रसन्न : HOW TO PLEASE GOD


मित्रो !
     ईश्वर को प्रसन्न करना है तो सबसे पहले यह जानो कि ईश्वर को क्या पसंद है और उसे क्या पसंद नहीं है। उसके बाद वही करो जो उसे पसंद है।  ऐसा करने से बचो जो ईश्वर को पसंद नहीं है।



Tuesday, February 13, 2018

OUR ENEMIES

Friends!
            No matter, how wise a person is, eroticism, anger, egotism and greed always take away his wisdom.
    कोई व्यक्ति कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो, काम, क्रोध, मद या लोभ उसकी बुद्धि हर लेते हैं


Saturday, February 3, 2018

तीर्थ और पूजा : Pilgrimage, and Prayer

मित्रो!
     पवित्र स्थल की यात्रा या किसी देवता की पूजा किसी व्यक्ति को अपराध करने का अधिकार नहीं देते। 


          Pilgrimage and prayer do not grant a license to any person to commit a crime.


Wednesday, January 31, 2018

जीवित और मृत शरीर में अन्तर


मित्रो !
          किसी जीवित व्यक्ति के शरीर में जो अंग पाये जाते हैं वही अंग उसकी मृत्यु होने पर मृत शरीर में रहते हैं तब यह विचारणीय हो जाता है कि वह क्या चीज है जिसके शरीर में न रहने से मृत्यु हो जाती है। सामान्य बोल-चाल की भाषा में हम कह देते हैं कि अमुक व्यक्ति ने प्राण त्याग दिए हैं। शरीर में वह क्या चीज है जिसके न रहने से हमारा दिमाग और दिल काम करना बंद कर देता है? यह गूढ़ प्रश्न हैं। ऐसे में हम कल्पना कर सकते हैं कि हमारे शरीर में शरीर के अंगों के अतिरिक्त कोई ऐसी चीज है जो हमारे जन्म के समय हमारे शरीर में प्रवेश करती है और हमारे शरीर को जीवन्त बनाती है। यही चीज मृत्यु के समय हमारे शरीर को छोड़ देती है।
         "मैं" एक ऐसा शब्द है जिसे बोलने वाला केवल अपने को संदर्भित करने के लिए ही प्रयोग कर सकता है। इसे व्यक्ति जीवित रहते ही बोल सकता है अतः कोई व्यक्ति इसका प्रयोग जन्म के उपरान्त और मृत्यु से पूर्व ही कर सकता है। शब्द "मेरा" व्यक्ति के संबंधों और अधिकारों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यदि हम किसी व्यक्ति से उसके शरीर के किसी अंग के बारे में पूछें कि यह क्या है तब वह उत्तर देगा कि यह मेरा हाथ है, यह मेरा पाँव है, यह मेरी उँगली है, आदि-आदि। किसी व्यक्ति के शरीर में जो भी अंग हैं उन सभी पर "मैं" का अधिकार होगा। शरीर में पदार्थ के रूप में (in material form) जो कुछ भी होता है उस पर स्वामित्व "मै" का होता है। जीवित शरीर इस "मै" जो पदार्थ रूप में नहीं होता और शरीर के अंग जो पदार्थ रूप होते हैं से बना होता है। मृत शरीर में केवल शरीर के अंग ही होते हैं जो पदार्थ रूप में होते हैं। इस प्रकार मृत शरीर "मै" विहीन शरीर होता है। तब प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि शरीर के अंदर वह कौन और कहाँ है जो पूरे शरीर पर अपना अधिकार जताता है? निश्चित रूप से वह पदार्थ रूप में नहीं है अन्यथा उसके सम्बन्ध में भी कहा जा सकता "यह मैं हूँ". यह अदृश्य है और शरीर में जीवन का कारण है।
उपर्युक्त विवेचन के आधार पर हम कह सकते हैं कि -
        जीवित शरीर और मृत शरीर में यह अन्तर होता है कि जीवित शरीर के अन्दर एक ऐसा "मै" निवास करता है जो जन्म के समय शरीर को क्रियाशील कर देता है और जीवन पर्यन्त शरीर को क्रिया विहीन नहीं होने देता। "मैं" के शरीर छोड़ देने पर शरीर क्रिया विहीन हो जाता है और ऐसा शरीर मृत शरीर कहलाता है। प्राणी के शरीर और बाह्य जगत से सम्बन्धों का कारण भी "मैं" ही है।


Monday, January 29, 2018

THE CONSCIENCE

अंतरात्मा की आवाज़ : The Conscience
मानव शरीर में अंतरात्मा से पवित्र और कोई चीज नहीं होती। जो व्यक्ति पवित्र वस्तु को कुचलता है उसका भला कैसे हो सकता है। अंतरात्मा मनुष्य की परम हितैषी होती है। परम हितैषी की की हत्या से बड़ी न तो कोई हिंसा हो सकती है और न ही कोई बड़ा अपराध हो सकता है। 
अंतरात्मा की आवाज़ जब उठती है तब वह आदमी के भले के लिए ही उठती है। जो अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को नहीं सुनता या सुनकर भी अनसुनी कर देता है वह अपना दुश्मन स्वयं बन जाता है। 
Don't kill your conscience.


Monday, January 22, 2018

O MOTHER EARTH!

धरती माँ (भूमि) की स्तुति -
यत् ते भूमे बिखनामि क्षिप्रं तदपि रोहतु। 
मा ते मर्म विमृग्वरि मा ते हृदयमर्पिपम्।
हे धरती माँ ! जब हम (औषधियां, कंद आदि निकालने अथवा बीज बोन के लिए) आपको खोदें, तब वे शीघ्र उगें। हमारे द्वारा आपके मर्म स्थलों को अथवा आपके ह्रदय को हानि न पहँचे।
Whatever I dig from thee, Earth, may that have quick growth again;
O purifier ! may we not injure thy vitals or thy heart. (Atharva Veda 12.1.36).


Sunday, December 31, 2017

सुस्वागतम 2018 : Welcome 2018

मित्रो !
     नव वर्ष 2018 के आगमन पर मैं सभी जनों, मित्रों और शुभचिंतकों का यथायोग्य अभिवादन और अभिनन्दन करता हूँ। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सभी को नव वर्ष में अच्छे स्वास्थ्य,सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद दे तथा आप सभी आत्म-विश्वास, आत्म-सम्मान, सकारात्मक सोच और आशावादी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ कर वांछित सफलतायें प्राप्त करें।

अलविदा वर्ष 2017 : Bye Year 2017


मित्रो !
        वर्ष 2017 की विदाई पर मैं अपने स्वजनों, मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति यथायोग्य सम्मान व्यक्त करते हुए उनका अभिवादन करता हूँ, उनसे मुझे अब तक जो प्यार, स्नेह या सम्मान मिला उसके लिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूँ तथा मुझसे उनके प्रति अब तक जाने - अनजाने में हुयी गुस्ताखियों और त्रुटियों के लिए मैं उनसे क्षमा माँगता हूँ।


Saturday, December 30, 2017

नव वर्ष पूर्व संध्या पर क्या खोयें, क्या पायें

मित्रो !
        समय सदैव गतिमान रहता है और हमें ऐसा अवसर कभी नहीं देता कि हम अपने जीवन के बीते हुए समय में की गयी भूलों का, उन पलों जिनमें ऐसी भूलें की गयीं थी में जाकर, सुधार कर सकें। जीवन के किसी गुजरे पल में की गयी किसी त्रुटि को कभी भी गुजरे हुए पल में जाकर ठीक किया जाना संभव नहीं है, केवल भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति का रोका जाना ही संभव है। यह तभी संभव हो सकता है जब हम अपने द्वारा कृत कार्यों और व्यवहृत आचरण का समय-समय पर अनुश्रवण करते रहे और अपने क्रिया-कलापों के उचित या अनुचित होने का विश्लेषण करते रहे।
        वैसे तो मेरा विचार है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने द्वारा प्रतिदिन किये गए आचरण और कार्यों की समीक्षा के लिए 5 मिनट का समय आरक्षित कर देना चाहिए। इस समय में उसे दिन भर के क्रिया-कलापों की समीक्षा करके गलत और सही का निर्धारण करते रहना चाहिए। यह समय रात्रि में सोने से पहले का 5 मिनट का समय हो सकता है। किन्तु किन्हीं कारणों से यदि हम ऐसा नहीं करते तब हमें यह कार्य प्रकृति द्वारा निर्धारित एक वर्ष के प्रत्येक अंतराल की समाप्ति पर अवश्य कर लेना चाहिए। इस दिन हमें गुजरे वर्ष में किये गए कार्यों और व्यवहृत किये गए आचरण की समीक्षा कर पता लगाना चाहिए कि जीवन में हम सही रास्ते पर जा रहे हैं अथवा नहीं? हमें जीवन में सही रास्ते पर बने रहने के लिए क्या अपनाना है और क्या छोड़ना है? जीवन के ऐसे कौन से ऐसे पहलू हैं जो अपेक्षित होते हुए भी उपेक्षित रहे हैं। यदि जीवन में तनाव है तब किन कारणों से। यदि जीवन में खुशी का अभाव है तब इसके पीछे क्या कारण रहे हैं ... ।
       आज जबकि वर्ष 2017 समाप्त होने जा रहा है, मेरा आपसे अनुरोध है कि आप New Year's Eve पर इस सम्बन्ध में विचार करने के साथ-साथ निम्नलिखित विन्दुओं पर भी विचार अवश्य करें : 
1. क्या आपके अपने बड़ों के प्रति आपके क्रिया-कलाप ऐसे रहे हैं जो उनका आशीर्वाद पाने के लिए उचित एवं पर्याप्त कहे जा सकें?
2. क्या आप उनको, जो आप से प्यार और सरंक्षण की अपेक्षा करते हैं, को उचित सरंक्षण और प्यार दे पाने में सफल रहे हैं?
3. क्या आप अपने परिवारीय सदस्यों की आवश्यकताएं पूरी करने, उन्हें प्यार, सरंक्षण और खुशी देने में सफल रहे हैं?
4. क्या आपने उनके, जो आप पर निर्भर हैं, भविष्य को सुरक्षित करने के कोई प्रयास किये हैं?
5. क्या आप अपने कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति ईमानदार और निष्ठावान रहे हैं? 
6. आप क्रोध और ईर्ष्या पर किस सीमा तक नियंत्रण पाने में सफल रहे हैं?
7. समाज में आपकी छवि कैसी रही है? 
8. क्या आपके निर्णय निष्पक्ष रहे हैं?
9. क्या आपके कृत्य आपको यथोचित सम्मान और प्यार दिलाने के लिए पर्याप्त रहे हैं?
10. क्या आपने किसी अवसर पर किसी असहाय या जरूरत मंद की सहायता की है?
11. वे कौन से क्रिया-कलाप हैं जो आपको नहीं करना चाहिये था?
12. क्या आपने कोई ऐसे कृत्य भी किये हैं जो सृजनात्मक नहीं थे?
13. आप अपने अबांछित विचारों पर नियंत्रण रख पाने में कहाँ तक सफल रहे हैं?
14. क्या आप अपनी गलतियों पर शर्मिंदा हुये हैं?
15. क्या आप दूसरों की ऐसी गलतियों के लिए जिनके लिए आप उन्हें क्षमा कर सकते थे किन्तु फिर भी आप उनको क्षमा करने में विफल रहे हैं? 
16. क्या आपने समय का सदुपयोग किया है?
17. क्या आप अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहे हैं? आपकी जीवन शैली स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं डाल रही है?
18. क्या आपके बच्चे आपके सरंक्षण में उचित मार्ग पर प्रसस्त हो रहे हैं?
19. ऐसे कौन से अनुपयोगी क्रिया-कलाप रहे हैं जिनसे आप छुटकारा पाना चाहेंगे?
20. ऐसे कौन से नए क्रिया-कलाप हो सकते हैं जो आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं?
मेरा विश्वास है कि मेरे मित्र इस दिशा में अपना योगदान देकर मुझे कृतार्थ करेंगे।
नव वर्ष पर पुनः भेंट की आशा के साथ,
केशव दयाल।

Sunday, December 24, 2017

जीएसटी में ऐसा क्यों? WHY SO IN GST?

मित्रो !
      जब  जीएसटी काउन्सिल ने सर्वसम्मति से विशिष्ट श्रेणी राज्यों में  10 लाख रूपया तथा अन्य राज्यों में 20 लाख रूपया के नीचे वार्षिक टर्नओवर रखने वाले छोटे कारोबारियों को जीएसटी नेट (net) से बाहर रखे जाने का निर्णय लिया था तब सेन्ट्रल जीएसटी एक्ट और स्टेट जीएसटी एक्ट में धारा 24 लाकर बड़ी संख्या में  छोटे कारोबारियों को ऐसी छूट से बंचित क्यों कर दिया गया है?
      संविधान के अनुच्छेद 279A में जीएसटी से सम्बंधित विभिन्न विषयों जिनमे जीएसटी कानून का मॉडल लॉ का ड्राफ्ट भी शामिल है पर संघ और राज्यों को संस्तुतियां देने के लिए जीएसटी काउन्सिल के गठन का प्राविधान किया गया है। इस प्राविधान के अंतर्गत महामहिम राष्ट्रपति द्वारा माल और सेवा कर परिषद् (Goods and Services Tax Council) का गठन किया गया है। इस अनुच्छेद के क्लॉज (4) (d) में यह अपेक्षा की गयी थी कि परिषद् टर्नओवर की ऎसी अवसीमा (the threshold limit of turnover) की संस्तुति संघ और राज्यों को करेगी जिसके नीचे वस्तु और सेवाओं को वस्तु एवं सेवा कर से मुक्त रखा जा सकेगा।
      परिषद् ने दिनांक 22 एवं 23 सितम्बर 2016 को संपन्न हुयी बैठक में विशिष्ट श्रेणी राज्यों के लिए 10 लाख रूपया और अन्य राज्यों के लिए 20 लाख रूपया की थ्रेसहोल्ड लिमिट ऑफ़ टर्नओवर (threshold limit of turnover) रखे जाने का सर्व सम्मति से निर्णय लिया था। किन्तु केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम  और राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम का मसौदा (Draft) तैयार करते समय इनमें धारा 24 लाकर परिषद् द्वारा अपने निर्णय को ही मान्यता देकर छोटे-छोटे कारोबारियों  पर जीएसटी लगा दिया गया है।
दिनांक 22-23 सितम्बर 2016 की बैठक के कार्यवृत (Minutes of meeting) के सम्बंधित अंश निम्न प्रकार हैं।
"Agenda Item 3: Thresholds for exemption and composition under GST
9. A presentation was made by Shri Manish K. Sinha, Commissioner, Central Excise, CBEC in which it was suggested that in the GST regime, the threshold limit for a taxpayer to get registered should be Rs. 25 lakhs for all States other than the eleven Special Category States mentioned in Article 279A of the Constitution. The Composition threshold was suggested to be Rs. 50 lakhs. It was also suggested that Service providers should be kept out of the Composition scheme.
EXEMPTION THRESHOLD
10. The Secretary to the Council explained that by raising the exemption limit to Rs.25 lakhs, 60% of tax-payers would be out of the tax net but the loss of revenue would only be 2%. The Hon'ble Chief Minister of Puducherry stated that an exemption limit of Rs. 25 lakhs for his Union Territory would mean that 12% of traders would go out of the tax net and would result in substantial revenue loss. He suggested that for the small states, the threshold for exemption should be Rs. 10 lakhs. The Hon'ble Deputy Chief Minister of Delhi stated that the exemption limit of Rs. 10 lakhs was too low and that they had a good experience after increasing the threshold limit to Rs. 20 lakhs. The Hon'ble Minister from Kerala observed that the potential revenue loss by increasing the threshold was low but it would keep a large number of traders out of the tax net, which would help administrative efficiency. The Hon'ble Minister from Jammu and Kashmir also supported the threshold of Rs. 25 lakhs and stated that this would help in moving away from the control era. The States of Haryana, Chattisgarh, Gujarat, Jharkhand, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha, Rajasthan and West Bengal also supported the threshold exemption ofRs. 25 lakhs.
11. The Hon'ble Minister from Uttar Pradesh observed that increasing the threshold to Rs. 25 lakhs would mean that 4 lakhs of their registered tax payers would go out of the tax net who accounted for 7% of their revenue. He supported a threshold of Rs. 10 lakhs. The Hon'ble Ministers from Punjab, Telangana, Goa and Bihar also supported a threshold ofRs. 10 lakhs.
12. As regards the Special Category States, the Hon'ble Minister from Meghalaya informed that their present threshold was only Rs. 1 lakh and therefore, exemption for Special Category States should be Rs. 5 lakhs. The Hon'ble Minister from Mizoram also supported a threshold limit of Rs.5 lakhs. The Hon'ble Minister from Assam supported a threshold of Rs. 10 lakhs.
13. Given the difference in opinions, the issue was deferred for reconsideration to the next day. In the meeting of 23rd September 2016, after further discussion, it was agreed that the threshold exemption shall be Rs. 20 lakhs. The Chairperson also observed that taking note of the concerns expressed by the Hon'ble Chief Minister of Puducherry, this decision would be reviewed after 5 years (during which compensation for any loss of revenue is guaranteed) and a decision regarding any modification to the exemption threshold would be taken thereafter.
14. As regards the Special Category States enumerated in Article 279A of the Constitution, it was decided that the threshold exemption shall be Rs. 10 lakhs."
              
Source: GST Council official website:  http://www.gstcouncil.gov.in

    जिन मामलों में threshold limit of turnover अमान्य की गयी है उनसे सम्बंधित धारा 24 निम्नप्रकार है:
24. धारा 22 की उपधारा (1) में अंतर्वि‍ष्‍ट कि‍सी बात के होते हुए भी, व्‍यक्‍ति‍यों के नि‍म्‍नलि‍खि‍त प्रवर्गों को इस अधि‍नि‍यम  के अधीन रजि‍स्‍ट्रीकृत कि‍या जाना अपेक्षि‍त  होगा,--
(i)  व्‍यक्‍ति‍ जो अंतरराज्‍यि‍क कराधेय पूर्ति‍ करते हैं ;
(ii) कराधेय पूर्ति‍ करने वाले आकस्‍मि‍क कराधेय व्‍यक्‍ति‍ ;
(iii)  व्‍यक्‍ति‍‍ जि‍ससे आरक्षि‍त प्रभार के अधीन कर अदा करना अपेक्षि‍त है ;
(iv)  व्‍यक्‍ति‍ जि‍ससे धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन कर अदा करना अपेक्षि‍त है ;
 (v)  कराधेय पूर्ति‍ करने वाले अनि‍वासी कराधेय व्‍यक्‍ति‍ ;
(vi)  व्‍यक्‍ति‍ जि‍ससे धारा 51 के अधीन कर की कटौती करना अपेक्षि‍त है चाहे इस अधि‍नि‍यम के अधीन पृथक रूप से रजि‍स्‍ट्रीकृत हो या नहीं ;
 (vii) व्‍यक्‍ति‍ जो, चाहे अभि‍कर्ता के रूप में या अन्‍यथा, अन्‍य कराधेय व्‍यक्‍ति‍यों की ओर से कराधेय मालों या सेवाओं अथवा दोनों की पूर्ति‍ करते हैं ;
(viii) इनपुट सेवा वि‍तरक, चाहे इस अधि‍नि‍यम के अधीन पृथक रूप से रजि‍स्‍ट्रीकृत है या नहीं ;
 (ix)  व्‍यक्‍ति‍ जो धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन वि‍नि‍र्दि‍ष्‍ट पूर्ति‍ से भि‍न्‍न मालों या सेवाओं अथवा दोनों की ऐसे इलैक्‍ट्रानि‍क वाणि‍ज्‍य ऑपरेटर जि‍ससे धारा 52 के अधीन स्रोत पर कर एकत्र करना अपेक्षि‍त है, के माध्‍यम से पूर्ति‍ करता है ;
(x)  प्रत्‍येक इलैक्‍ट्रानि‍क वाणि‍ज्‍य ऑपरेटर ;
(xi) रजि‍स्‍ट्रीकृत व्‍यक्‍ति‍ से भि‍न्‍न, प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति‍ जो भारत से बाहर के स्‍थान से ऑन लाइन सूचना और डाटा आधारि‍त पहुंच या सुधार सेवाओं भारत में कि‍सी व्‍यक्‍ति‍ की पूर्ति‍ करता है ;
(xii) ऐसे अन्‍य व्‍यक्‍ति‍ या व्‍यक्‍ति‍यों का वर्ग जि‍न्‍हें केंद्रीय सरकार द्वारा परि‍षद् की सि‍फारि‍शों पर अधि‍सूचि‍त कि‍या जाए ।
          Compulsory registration in certain cases.
24. Notwithstanding anything contained in sub-section (1) of section 22, the following categories of persons shall be required to be registered under this Act,––
(i) persons making any inter-State taxable supply;
(ii) casual taxable persons making taxable supply;
(iii) persons who are required to pay tax under reverse charge;
(iv) person who are required to pay tax under sub-section (5) of section 9;
(v) non-resident taxable persons making taxable supply;
(vi) persons who are required to deduct tax under section 51, whether or not separately registered under this Act;
(vii) persons who make taxable supply of goods or services or both on behalf of other taxable persons whether as an agent or otherwise;
(viii) Input Service Distributor, whether or not separately registered under this Act;
(ix) persons who supply goods or services or both, other than supplies specified under sub-section (5) of section 9, through such electronic commerce operator who is required to collect tax at source under section 52;
(x) every electronic commerce operator;
(xi) every person supplying online information and database access or retrieval services from a place outside India to a person in India, other than a registered person; and
(xii) such other person or class of persons as may be notified by the Government on the recommendations of the Council.
वस्तु एवं सेवा कर परिषद् के ऐसे निर्णय से अनेक छोटे-छोटे कारोबारियों का कारोबार और रोजगार मुश्किल में पड़ गया है।