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Thursday, August 3, 2017

चिंताओं का विनाश चिन्तन से

मित्रो !
अपने शरीर के लिए सुख - साधन जुटाना और शरीर को रोग, बुढ़ापा तथा मृत्यु से मुक्ति दिलाना अधिकांश व्यक्तियों के लिए चिन्ता तो कुछ के लिए चिन्तन का विषय बने रहे हैं। कालान्तर में चिन्तन घटा है और चिन्तायें बढ़ीं हैं। विडम्बना यह है कि मनुष्य अब तक यह नहीं समझ पाया है कि चिन्तन की लौ ही चिंताओं को भस्म कर सकती है।


Saturday, August 22, 2015

मोक्ष की प्रासंगिकता


मित्रो ! 

        आधुनिक जीवन में मोक्ष का विचार अधिकाँश लोगों को असंगत और वैराग्य की ओर धकेलने वाली अवधारणा लगती है। किन्तु रोग, बुढ़ापा और मृत्यु के भय से छुटकारा पाने के सन्दर्भ में जन्म और मृत्यु के बन्धन से मुक्ति का विचार असंगत नहीं ठहराया जा सकता।