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Thursday, August 3, 2017

चिंताओं का विनाश चिन्तन से

मित्रो !
अपने शरीर के लिए सुख - साधन जुटाना और शरीर को रोग, बुढ़ापा तथा मृत्यु से मुक्ति दिलाना अधिकांश व्यक्तियों के लिए चिन्ता तो कुछ के लिए चिन्तन का विषय बने रहे हैं। कालान्तर में चिन्तन घटा है और चिन्तायें बढ़ीं हैं। विडम्बना यह है कि मनुष्य अब तक यह नहीं समझ पाया है कि चिन्तन की लौ ही चिंताओं को भस्म कर सकती है।


Tuesday, September 13, 2016

ज्ञान का अनन्य स्त्रोत श्रीमद भगवद गीता : The Infinite Source of Knowledge, Shrimad Bhagvad Gita

मित्रो !

     जब आप सभी ओर से निराशा, हताशा, तनाव, चिंता, दुःख, भय, अज्ञान से घिरे हुए हों तब गीता का ज्ञान आपको इनसे छुटकारा दिलाता है। गीता में केवल जन्म-मृत्यु के बंधनों से छुटकारा दिलाने से सम्बंधित दिव्य ज्ञान ही नहीं अपितु इसमें साधारण मनुष्यों के व्यावहारिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों और कष्टों  से छुटकारा दिलाने के लिए भी सम्पूर्ण ज्ञान उपलब्ध है।  
    
     सत्य और ज्ञान किसी भी धर्म से ऊपर उठकर होते हैं। किसी धर्म विशेष का अनुशरण करने वाले किसी परिवार में जन्मे व्यक्ति द्वारा दिया गया ज्ञान किसी अन्य धर्म के अनुयायी के लिए अज्ञान नहीं हो जाता और न ही किसी ज्ञान की महत्ता इस कारण से कम हो जाती है कि उसको देने वाला किसी दूसरे धर्म में अवतरित हुआ था। यदि सत्य इसके विपरीत रहा होता  तब अब तक हुयी वैज्ञानिक खोजों का लाभ सभी को सुलभ हो पाना संभव नहीं रहा होता। 

    Whenever you find yourself surrounded by disappointment, frustration, stress, anxiety, sorrow, fear, ignorance then the Gita can help you in restoring your self. The Gita not only has the highest category of knowledge for getting rid of bondage of birth and death, but it also has the the knowledge to relieve a common man of his sufferings and pains in his practical life.

     Truth and knowledge are independent of a religion. They are above all religions. Any knowledge, for a person following a particular religion, given by a person following another religion, does not become ignorance (agyaaan) nor importance of any knowledge diminishes because it was revealed by a person who was born in a family following any other religion. Had the truth been otherwise, then benefit of scientific researches could not have been available to people of all religions.


   

Friday, September 2, 2016

मृत्यु से भय का कारण अज्ञान : Cause Of Fear Of Death Is Ignorance

मित्रो !
       किसी वस्तु पर केवल उसके रचनाकार का ही अधिकार हो सकता है। हमने स्वयं अपनी रचना नहीं की है, हमारा रचयिता कोई और ही है। अज्ञान और मिथ्या अहंकार के कारण हम दूसरे की रचना पर अपना अधिकार मान बैठे हैं। हमारे मृत्यु से भय का कारण यही है। 
    Only creator of an object can have rights in the object created. We have not created ourselves, our creator is someone else. Due to false pride and ignorance we assume our authority over other's creation. This is the sole cause of our fear of death.
  किसी कृति (creation) पर कृति की रचना करने वाले रचनाकार अथवा ऐसे व्यक्ति जिसके आदेश पर या जिसके लिए रचनाकार ने रचना की है का ही अधिकार हो सकता है। हमने स्वयं अपनी रचना नहीं की है और न ही हमारे आदेश पर किसी रचनाकार ने हमारी रचना की है। अज्ञान और मिथ्या अहंकार के कारण हम दूसरे की रचना पर अपना अधिकार मान बैठे हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने द्वारा दी गयी अपनी वस्तु बापस लेता है तब इसमें शोक कैसा? जो वस्तु हमारी है ही नहीं उसके छिन जाने का भय कैसा? जब कोई दूसरा व्यक्ति अपनी वस्तु हमें उपयोग के लिए देता है तब हमें उस वस्तु पर स्वामित्व का अधिकार नहीं मिलता। तब हम वस्तु देने वाले से यह कैसे कह सकते हैं कि वह वस्तु बापस लेने का अधिकारी नहीं है। हमें तो दूसरे के द्वारा हमारे उपयोग के लिए वस्तु दिए जाने के लिए उसका कृतज्ञ होना चाहिए। 


Monday, June 6, 2016

जन्म और मृत्यु : Birth and Death

Friends !
          Association, of consciousness with inanimate, gives birth to an animate. Separation of consciousness and animate, leaves the animate an inanimate.


मित्रो !
     चेतना का निर्जीव के साथ जुड़ाव (union) सजीव को जन्म देता है। चेतना का सजीव से अलगाव, सजीव को मृत छोड़ता है।


Saturday, August 22, 2015

मोक्ष की प्रासंगिकता


मित्रो ! 

        आधुनिक जीवन में मोक्ष का विचार अधिकाँश लोगों को असंगत और वैराग्य की ओर धकेलने वाली अवधारणा लगती है। किन्तु रोग, बुढ़ापा और मृत्यु के भय से छुटकारा पाने के सन्दर्भ में जन्म और मृत्यु के बन्धन से मुक्ति का विचार असंगत नहीं ठहराया जा सकता।


Wednesday, July 8, 2015

मृत्यु क्या है : What is Death?

मित्रो !
       पांच तत्वों से बना पांच कर्मेन्दिर्यों, पांच ज्ञानेन्द्रियों, मन, बुद्धि और अहंकार वाला यह शरीर जीवात्मा के इसमें प्रवेश करने पर क्रियाशील होता है और जब तक जीवात्मा शरीर में रहता है, शरीर में चेतना रहती है। जीवात्मा द्वारा शरीर का त्याग कर देना ही मृत्यु है।

      मृत्यु के उपरान्त शरीर क्रियाविहीन हो जाता है। जीवात्मा के शरीर को छोड़ देने पर जीवात्मा शरीर और इस संसार की अनेक जड़ तथा चेतन वस्तुओं से बनाये गये मोह बन्धनों से मुक्त हो जाती है।