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Saturday, February 11, 2017

जानने योग्य : WORTH KNOWING

मित्रो !
तीन गुणों वाली प्रकृति, अहंकार, मन, बुद्धि और इन्द्रियों के कारण जीवात्मा सभी प्रकार के  अच्छे और बुरे कर्म करता है।
 
प्रकृति = जीव की सतो, रजो और तमो गुणों वाली जन्म से मिली प्रकृति।
अहंकार = जीव के अंदर "मैं हूँ", "मैं कर्त्ता हूँ" और "मैं ही भोक्ता हूँ" का अहम् भाव।
इन्द्रियाँ = पांच (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) ज्ञानेन्द्रियाँ और हाथ, पैर, वाणी, जननेन्द्रिय और गुदा पांच कर्मेन्द्रियाँ।

             ज्ञानेन्द्रियों में आँख से देखने, कान से सुनने, नाक से सूंघने, जीभ से स्वाद लेने, और त्वचा से स्पर्श करने से ज्ञान प्राप्त होता है। कर्मेन्द्रियों में हाथ और पैरों से कार्य करने, वाणी से बोलने, जननेन्द्रिय से संतान पैदा करने और गुदा से मल त्याग करने का कार्य होता है।




Friday, June 17, 2016

सर्वोत्तम भोजन : The Best Food : Things to Remember

मित्रो !
     दुष्प्रभाव रहित, सुपाच्य और स्वास्थयबर्धक भोजन ही सर्वोत्तम भोजन है। ऐसे भोजन से शरीर, मन और बुद्धि स्वस्थ रहते हैं, शरीर निरोग रहता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Friends !
         Our food should be easily digestible, promote our health and should not have side effects.



Wednesday, July 8, 2015

मृत्यु क्या है : What is Death?

मित्रो !
       पांच तत्वों से बना पांच कर्मेन्दिर्यों, पांच ज्ञानेन्द्रियों, मन, बुद्धि और अहंकार वाला यह शरीर जीवात्मा के इसमें प्रवेश करने पर क्रियाशील होता है और जब तक जीवात्मा शरीर में रहता है, शरीर में चेतना रहती है। जीवात्मा द्वारा शरीर का त्याग कर देना ही मृत्यु है।

      मृत्यु के उपरान्त शरीर क्रियाविहीन हो जाता है। जीवात्मा के शरीर को छोड़ देने पर जीवात्मा शरीर और इस संसार की अनेक जड़ तथा चेतन वस्तुओं से बनाये गये मोह बन्धनों से मुक्त हो जाती है।