Showing posts with label efforts. Show all posts
Showing posts with label efforts. Show all posts

Wednesday, July 6, 2016

बोल-चाल जारी रहे तो ही अच्छा : Continuation of Dialogue is Better

 मित्रो !
         बोल-चाल बंद होने की स्थिति में जीवन में कटुता भर जाती है। इससे गलतफहमियां पैदा होतीं हैं और रिस्तो में दरार पड़  जाती है। मनुष्य को चाहिए कि वह ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने दे और अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है तब इससे निकलने के लिए सार्थक प्रयास करे।


Thursday, May 22, 2014

RELIGION FOR PRACTICE : धर्म अनुशरण के लिए

यदि धर्म ग्रंथों के पन्नों पर प्रयोग का फरुआ न चलाया गया तब धर्म न रहकर एक काला आवरण रह जाएगा जिसके पीछे राम-नाम कहते हुए मानव नहीं निर्जीव शिला खण्ड होंगे।  ऐसी स्थिति में मैं अपने विशेषाधिकार अथवा अनाधिकार चेस्टा से प्रक्रिया को धर्म की निंदा करना या धर्म की मखौल उड़ाना आदि से ही सम्बोधित करूँगा।
फरुआ = फावड़ा, काला आवरण =black curtain, निर्जीव =Dead, inanimate object, विशेषाधिकार = Special reight, अनाधिकार = without any authority, चेष्टा =efforts. मखौल उड़ाना= To cut a joke