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Monday, August 14, 2017

ईश्वर के अवतरित होने का प्रयोजन

मित्रो !
            सनातन धर्म के सुविख्यात ग्रन्थ श्रीमद भगवद गीता के अध्याय 4 के श्लोक 7 श्लोक 8 में भगवान श्री कृष्ण द्वारा युग -युग में अवतरित होने के कारणों  का वर्णन निम्न प्रकार किया गया है:

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम॥
            हे भारत ! जब-जब धर्मकी हानि और अधर्मकी वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने रूपको रचता हूँ (अर्थात् साकाररूपसे प्रकट होता हूँ)

परित्राणाय साधूनां विनाशाय दुष्कृताम। धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे
     
            साधु पुरुषों का उद्धार करने, दुष्टों का विनाश करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ
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