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Sunday, August 13, 2017

गुनाहों का बोझ हल्का करते चलें

मित्रो !
.      आदमी को चाहिए कि वह गुनाह करने से बचे और यदि कोई गुनाह हो भी जाता है तब उसका बोझ हल्का करने के लिए कोई एक नेक कर्म करे। न जाने अंत में गुनाह याद करने का वक़्त मिले या न मिले और अगर मिले भी तो उन्हें हल्का करने के लिए वक़्त कम पड़ जाय। 
      यों तो कर्म-फल सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक कर्म का एक फल होता है, बुरे कर्म का फल बुरा और अच्छे कर्म का फल अच्छा होता है। अतः गुनाहों का फल बुरा होना निश्चित है किन्तु एक नेक कर्म कर लेने से गुनाह करने से होने वाला अपराध बोध कम हो जाता है, आदमी यह सोचता है कि उसने नेक करके गुनाह का प्रायश्चित कर लिया है। ऐसे में उसके मन में अपने प्रति घृणा का भाव कम हो जाता है। दूसरे गुनाह और नेक कर्मों में संतुलन भी बना रहता है। 
      A man should avoid committing a sin. However, if he falls a victim of committing a sin, he should do some noble deed to reduce its gravity. Nobody knows that in the last, he will get or not the time for recollecting those sins and even if he gets time, it will not fall short for reducing gravity of the sins.

Friday, September 9, 2016

मेरे गुनाह के पीछे दोष जमाने का भी है : World is also a culprit in my sins

मित्रो !
अगर इस दुनिया ने उकसाया न होता तो शायद मैंने गुनाह न किया होता।  जमाने में संभल कर चलने वालों के लिए भी चुनौतियां बहुत हैं। 


Sunday, August 14, 2016

गुनाहों का बोझ हल्का करते चलें

  • मित्रो !
    .
    आदमी को चाहिए कि वह गुनाह करने से बचे और यदि कोई गुनाह हो भी जाता है तब उसका बोझ हल्का करने के लिए कोई एक नेक कर्म करे। न जाने अंत में गुनाह याद करने का वक़्त मिले या न मिले और अगर मिले भी तो उन्हें हल्का करने के लिए वक़्त कम पड़ जाय। 
      यों तो कर्म-फल सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक कर्म का एक फल होता है, बुरे कर्म का फल बुरा और अच्छे कर्म का फल अच्छा होता है। अतः गुनाहों का फल बुरा होना निश्चित है किन्तु एक नेक कर्म कर लेने से गुनाह करने से होने वाला अपराध बोध कम हो जाता है, आदमी यह सोचता है कि उसने नेक करके गुनाह का प्रायश्चित कर लिया है। ऐसे में उसके मन में अपने प्रति घृणा का भाव कम हो जाता है। दूसरे गुनाह और नेक कर्मों में संतुलन भी बना रहता है। 

       A man should avoid committing a sin. However, if he falls a victim of committing a sin, he should do some noble deed to reduce its gravity. Nobody knows that in the last, he will or not get the time to recollect those sins and if he gets time, it will not fall short for reducing gravity of the sins.

Tuesday, July 19, 2016

क्षमा से दोषमुक्ति नहीं मिलती : Forgiveness is not an acquittal

मित्रो !
          क्षमा माँगने और क्षमा कर देने से किये गए गुनाह या गलती की गम्भीरता कम नहीं हो जाती केवल गुनाह या गलती करने वाले और क्षमा कर देने वाले के मध्य भविष्य के लिए रिश्ते सामान्य हो जाते हैं। मनुष्य को प्रयास करना चाहिए कि भविष्य में उससे गुनाह या गलती न हो।
        
       इसका यह अभिप्राय कदापि नहीं है कि क्षमा मांगना और क्षमा कर देना व्यर्थ है। आहत होने के बाद मनमुटाव का समाप्त हो जाना, रिश्तों का सामान्य हो जाना भी अपने में बहुत बड़ी उपलब्धि है। क्षमा माँगने और क्षमा कर देने से मैत्री भाव भी उत्पन्न होता है, विनम्रता आती है और अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
     किसी को कष्ट पहुँचाने के तुम्हारे गुनाह के लिए वह तुम्हें क्षमा कर भी दे लेकिन इससे तुम्हारे द्वारा किये गए गुनाह की गम्भीरता तो कम नहीं होगी। कोशिश करो कि भविष्य में तुमसे कोई गुनाह न हो।