Peace, Co-existence, Universal Approach Towards Religion, Life, GOD, Prayer, Truth, Practical Life, etc.
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Thursday, August 11, 2016
Tuesday, July 19, 2016
क्षमा से दोषमुक्ति नहीं मिलती : Forgiveness is not an acquittal
मित्रो !
क्षमा माँगने और क्षमा कर देने से किये गए गुनाह या
गलती की गम्भीरता कम नहीं हो जाती केवल गुनाह या गलती करने वाले और क्षमा कर देने
वाले के मध्य भविष्य के लिए रिश्ते सामान्य हो जाते हैं। मनुष्य को प्रयास करना
चाहिए कि भविष्य में उससे गुनाह या गलती न हो।
इसका यह अभिप्राय कदापि नहीं
है कि क्षमा मांगना और क्षमा कर देना व्यर्थ है। आहत होने के बाद मनमुटाव का
समाप्त हो जाना, रिश्तों का सामान्य हो जाना
भी अपने में बहुत बड़ी उपलब्धि है। क्षमा माँगने और क्षमा कर देने से मैत्री भाव भी उत्पन्न होता है, विनम्रता आती है और अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
किसी को कष्ट पहुँचाने के तुम्हारे गुनाह के लिए वह तुम्हें क्षमा कर भी दे लेकिन इससे तुम्हारे द्वारा किये गए गुनाह की गम्भीरता तो कम नहीं होगी। कोशिश करो कि भविष्य में तुमसे कोई गुनाह न हो।
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Wednesday, July 13, 2016
बड़प्पन की निशानी : Signs of Greatness
मित्रो !
अपनी खुद की गलतियों के लिए क्षमा माँग लेना और दूसरों की गलतियों के लिए उन्हें क्षमा कर देना बड़प्पन की निशानियाँ हैं। केवल विशाल हृदय रखने वाले व्यक्ति ही ऐसा कर सकते हैं। मनुष्य को चाहिए कि वह विशाल हृदय का स्वामी बने।
To tender apology for one's own mistakes and to forgive others for their mistakes are signs of greatness. Only those persons who own vast heart can do so. Man should try to be owner of a vast heart.
Wednesday, June 3, 2015
क्षमा याचना : बदलता स्वरुप कितना उचित
मित्रो !
कभी न कभी गलतियां हम सभी से होतीं हैं। कुछ गलतियाँ ऐसी होतीं हैं जिनका परिणाम गलती करने वाले के लिए ही हानिकारक होता है तथा कुछ गलतियों के फलस्वरूप अन्य व्यक्ति को हानि होती है अथवा चोट या दुःख पहुँचता है। दूसरे प्रकार की गलती के लिए यदि हम दूसरे व्यक्ति के सामने शर्मिंदा होकर अपनी गलती को स्वीकार न करें तब हम अपने दिल पर एक बोझ सा महसूस करते हैं और ऐसे व्यक्ति से कटे-कटे से रहते हैं। लेकिन जब हम उस व्यक्ति जिसको हानि हुयी है अथवा चोट या दुःख पहुंचा है के समक्ष अपनी गलती पर शर्मिंदगी महसूस करते हुए उस व्यक्ति से अपनी गलती को माफ़ किये जाने का अनुरोध कर लेते हैं तब हल्कापन महसूस करते हैं। ऐसा करने पर हमारे अन्दर अपराध बोध की भावना समाप्त हो जाती है।
वर्तमान में अनेक लोग इसका दुरुपयोग भी कर रहे हैं। ऐसे लोग जान-बूझकर ऐसे वक्तव्य देते हैं जिनसे दूसरे व्यक्तियों का अपमान होता है और उनको दुःख पहुँचता है। जान-बूझकर ऐसा वक्तव्य देने वाले कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं करते। जब उनके साथी उन्हें उनकी गलती का अहसास दिलाते हैं तब वे बड़ी ही आसानी से कह देते हैं "मेरे शब्दों से यदि किसी की भावनाएं आहत हुईं हों तब वे माफी माँगते हैं " . मेरे विचार से इसे क्षमा याचना विल्कुल नहीं कहा जा सकता है। वास्तव में जहाँ कोई किसी को जान-बूझकर आहत करता है वहाँ आहत करने वाले के अंदर गलती करने का अहसास ही नहीं होता। ऐसी स्थिति में गलती पर शर्मिंदा होने का प्रश्न ही नहीं उठता। यह आचरण न तो माफी मांगने के काबिल होता है और न ही माफी दिए जाने के काबिल।
मेरे इन्हीं विचारों ने मुझे आपके सामने निम्नलिखित विचार प्रस्तुत किये जाने के लिए प्रेरित किया है :
अपनी गलतियों पर क्षमा माँगना और और दूसरे की गलतियों के लिए उसे क्षमा कर देना मनुष्य के चरित्र के दैवीय गुण है। क्षमा याचना करने वाला व्यक्ति अपने गलत कृत्य पर शर्मिंदगी अनुभव करता है। क्षमा याचना दिल से की जाती है, क्षमा याचना महज एक औपचारिकता नहीं है। क्षमा याचना मनुष्य को अपराध बोध से मुक्ति दिलाती है। दबाव में अथवा अनमने मन या ढंग से माँगी गयी क्षमा, क्षमा याचना नहीं कही जा सकती।
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