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Friday, May 25, 2018

ठहरें और सोचें : STOP and THINK


Friends !
       क्या  हिंसा  और नफ़रत के चलते हमारी गौरवशाली संस्कृति और इतिहास कलंकित नहीं हो रहे हैं।  यदि हाँ, तब इसके लिए दोषी कौन है। ऐसा करके क्या हम समाज और इंसानियत को शर्मसार नहीं कर रहे हैं?

             Whether our glorious culture and history are not being tarnished due to violence and hatred. If yes, then who is the culprit for it. By doing so, are we not embarrassing society and humanity?



Tuesday, July 21, 2015

ताकि बच्चे संस्कारी बने

मित्रो !
     प्यार और प्यार की भाषा, दोनों ही ऐसे होते हैं जिनको अबोध बच्चे से लेकर मृत्यु शैय्या पर पड़ा व्यक्ति दोनों ही समझते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी प्यार खोना नहीं चाहता। अपने प्रिय को प्रसन्न रखने के लिए लोग न जाने क्या-क्या कर गुजरते हैं। इन्हीं कारणों से प्यार के बल पर हम अपने बच्चों को संस्कारी बनाये रखने में भी सफल हो सकते हैं। यह पोस्ट मेरी इसी सोच पर आधारित है। 

    प्यार में बहुत बड़ी शक्ति होती है। इसका उपयोग हम बच्चों को संस्कारी बनाने में कर सकते हैं। हमें चाहिए कि हम अनुकरणीय आचरण करते हुए अपने बच्चों को इतना प्यार दें कि उनके अन्दर आत्मीयता जन्म ले और वे कुछ भी अनुचित करने से पहले माँ-बाप का प्यार खो देने का डर महसूस करें।