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Saturday, July 30, 2016

इच्छाओं से कैसे निपटें : How to deal with desires

मित्रो !
       किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक साधन, सामर्थ्य और ज्ञान के होते हुए भी, इच्छा और इच्छाशक्ति के बिना, न तो कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है और न ही कोई अधूरा कार्य पूरा किया जा सकता है। 
       इच्छा रहित क्रियाशील जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह उपयुक्त और अनुपयुक्त इच्छाओं में विभेद करे और तदुपरान्त उसे चाहिए कि वह उपयुक्त इच्छाओं पर अमल करे और अनुपयुक्त इच्छाओं को दफ़न कर दे।
How to deal with desires
       One cannot think of an active life without desires. A person should differentiate in between appropriate and inappropriate desires and thereafter,. he should work on appropriate desires and should bury the inappropriate desires.

Sunday, June 12, 2016

साधन और लक्ष्य : Means and Goals


मित्रो !
         मानव शरीर लक्ष्य प्राप्त करने के लिए साधन है, लक्ष्य नहीं। 


Friends !
         
         The human body is the instrument for achieving the goal, not the goal.



Friday, June 3, 2016

प्रकृति को आहत न करें : Do not hurt the nature

मित्रो !

 प्रकृति अपना संतुलन अपने आप बनाती है। बाहरी हस्तक्षेप के बिना हमें प्रकृति को अपना काम करने देना चाहिए। यहाँ तक कि बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी हमें अपनी आवश्यकतानुसार न्यूनतम प्राकृतिक साधनों और संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए।

Friends !
           Nature maintains its equilibrium of its own. Let the nature do its own work with least outside intervention. Even to meet our basic needs, we should use minimal natural means and resources according to our requirement.






Tags:
Nature, hurt, equilibrium, intervention, requirement, natural, means, resources



    

Friday, February 26, 2016

सफलता के मूल में क्या है?


मित्रो !
         किसी कार्य को करने में सफल होने के लिए इच्छा, इच्छाशक्ति, ज्ञान और साधनों की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी एक की भी अनुपस्थिति में कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं होता। 
         इच्छा हमें कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, इच्छाशक्ति हमारे द्वारा कार्य को करने का दृढ़ संकल्प होता है जिसके कारण कार्य करने में आने वाली दिक्कतों पर हम विजय पाते हैं, इच्छाशक्ति हमें कार्य को अधूरा नहीं छोड़ने देती। ज्ञान हमें कार्य करने का तरीका बताता है। साधनों के अंतर्गत कार्य को करने के लिए आवश्यक सामिग्री, उपकरण, श्रम और शक्ति आते हैं। कोई भी कार्य प्रारम्भ करने से पहले हमें इन चारों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।