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Friday, February 26, 2016

सफलता के मूल में क्या है?


मित्रो !
         किसी कार्य को करने में सफल होने के लिए इच्छा, इच्छाशक्ति, ज्ञान और साधनों की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी एक की भी अनुपस्थिति में कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं होता। 
         इच्छा हमें कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, इच्छाशक्ति हमारे द्वारा कार्य को करने का दृढ़ संकल्प होता है जिसके कारण कार्य करने में आने वाली दिक्कतों पर हम विजय पाते हैं, इच्छाशक्ति हमें कार्य को अधूरा नहीं छोड़ने देती। ज्ञान हमें कार्य करने का तरीका बताता है। साधनों के अंतर्गत कार्य को करने के लिए आवश्यक सामिग्री, उपकरण, श्रम और शक्ति आते हैं। कोई भी कार्य प्रारम्भ करने से पहले हमें इन चारों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।


Friday, March 27, 2015

मा फलेषु कदाचन:

मित्रो !
श्रीमद भगवद गीता के अध्याय (chapter) 2 के श्लोक 47  में भगवन श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि  मनुष्य कौन सा कर्म (work / act / action) करे और कौन सा कर्म न करे इसका निर्णय लेना उसके अधिकार क्षेत्र में है किन्तु कर्म के फल के चयन करने (selection of good result or bad result, success or failure) का अधिकार उसे प्राप्त नहीं है। ऐसा इसलिए कहा गया है ताकि अनुचित कर्म करने वाला या उचित प्रकार से कर्म न करने वाला अच्छा फल (अच्छा परिणाम) का चयन (selection)  न कर सके। श्लोक की पहली पंक्ति का आशय यही है। पूरा श्लोक निम्नप्रकार है -

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥४७॥