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Sunday, October 2, 2016

Foresightedness : दूरदर्शिता

मित्रो !
      व्यक्ति को किसी रास्ते पर चलने से पूर्व यह अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए कि रास्ता कहाँ जाता है, रास्ते पर क्या कठिनाइयां आने वालीं हैं, उन पर विजय कैसे पाई जा सकेगी और यात्रा का अंत क्या होगा। रास्ता दुरूह होने की स्थिति में क्या कोई अन्य सुगम विकल्प हो सकता है। 
      किसी व्यक्ति को नया कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करने के उपरान्त कार्य करने का निर्णय लेना चाहिए: 
लक्ष्य की उपयोगिता एवं आवश्यकता 
उपकरणों और साधनों की उपलब्धता
लक्ष्य को प्राप्त करने के विभिन्न तरीके
लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आसान तरीका
लक्ष्य को प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों
कठिनाइयों पर काबू पाने के लिए साधन और तरीके
       Before a person starts a new work, he should consider following aspects:
Necessity and utility of achievement
Necessary and available tools and means
Different Ways to achieve the goal
Easiest way to achieve the goal
Forthcoming difficulties in achieving the goal
Ways and means for overcoming difficulties


Saturday, July 30, 2016

इच्छाओं से कैसे निपटें : How to deal with desires

मित्रो !
       किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक साधन, सामर्थ्य और ज्ञान के होते हुए भी, इच्छा और इच्छाशक्ति के बिना, न तो कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है और न ही कोई अधूरा कार्य पूरा किया जा सकता है। 
       इच्छा रहित क्रियाशील जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह उपयुक्त और अनुपयुक्त इच्छाओं में विभेद करे और तदुपरान्त उसे चाहिए कि वह उपयुक्त इच्छाओं पर अमल करे और अनुपयुक्त इच्छाओं को दफ़न कर दे।
How to deal with desires
       One cannot think of an active life without desires. A person should differentiate in between appropriate and inappropriate desires and thereafter,. he should work on appropriate desires and should bury the inappropriate desires.

Wednesday, June 3, 2015

इच्छा का महत्व


मित्रो !

किसी कार्य को संपादित करने के लिए, कार्य के अनुसार अपेक्षित साधनों, उपयुक्त शक्ति, अपेक्षित श्रम और कार्य सम्पादित करने की इच्छा का होना आवश्यक होता है। यदि अपेक्षित साधनों में ही उपयुक्त शक्ति और अपेक्षित श्रम को शामिल मान लिया जाय तब हम कह सकते हैं कि किसी कार्य को सम्पादित करने के लिए संसाधनों और कार्य सम्पादन की इच्छा की आवश्यकता होती है। 
जिस व्यक्ति द्वारा कार्य का सम्पादित किया जाना अपेक्षित होता है उसके लिए, कार्य की प्रकृति को देखते हुए, संसाधनों के तीन स्त्रोत हो सकते हैं। सभी संसाधन उसके शरीर से ही प्राप्त हो जांय अथवा सभी संसाधन उसके शरीर के बाहर से प्राप्त हों अथवा कुछ संसाधन उसके शरीर से प्राप्त हों और शेष संसाधन उसके शरीर के बाहर से। संसाधन किसी भी स्त्रोत से प्राप्त हों, कार्य करने की इच्छा कार्य करने वाले की अपनी होती है। जहां कार्य करने वाला किसी अन्य व्यक्ति के निर्देश पर करता है वहाँ पर भी कार्य करने की इच्छा उसकी अपनी होती है। 
कार्य करने की इच्छा के अभाव में न तो सक्रियता आती है और न ही कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। कार्य करने की इच्छा ही कार्य संपादन के दौरान निरंतरता बनाये रखती है। संसाधनों के अभाव में कार्य करने की इच्छा एक कल्पना, स्वप्न, सोच या योजना ही कही जा सकती है, कार्य का प्रारम्भ होना नहीं माना जा सकता। 
इन्ही विचारों ने मुझे यह कहने के लिए प्रेरित किया है कि :
किसी कार्य के सम्पादन के लिए साधन, शक्ति, श्रम और कार्य करने की इच्छा की आवश्यकता होती है। इनमें कार्य करने की इच्छा का विशिष्ट स्थान होता है। इच्छा के अभाव में किसी कार्य का प्रारम्भ किया जाना भी संभव नहीं है। इच्छा के अभाव में मुंह में उंडेला गया पानी भी हलक के नीचे नहीं उतर सकता।