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Friday, November 3, 2017

व्यवहारिक दृष्टिकोण : Practical Approach Helps

Good Morning Friends !
मित्रो !

            विशाल कार्य को देखकर घबराने की जरूरत नहीं होती अपितु उसे  पूरा करने के लिए धैर्य और सूझ-बूझ की जरूरत होती है। जिस प्रकार मुंह से बड़े आकार के फल को छोटे- छोटे टुकड़ों में विभाजित करके आसानी से खाया जा सकता है उसी प्रकार अनेक बड़े कार्यों, जिनकी विशालता को देखकर उनका पूरा किया जा सकना प्रथम दृष्टया (Prima Facie) असंभव लगता है और जिनकी विशालता को देखकर हम घबरा जाते हैं, को विभिन्न चरणों में विभाजित कर लेने पर आसानी से पूरा किया जा सकता है। किसी बड़े कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व हमें इस पर अवश्य विचार करना चाहिए।

Sunday, May 1, 2016

व्यवहारिक और उपयोगी ही सुन्दर


मित्रो !
       व्यापक प्रभाव वाले किसी कार्य या योजना को अमली जामा पहनाने से पूर्व ऐसे कार्य या योजना के क्रियान्वन के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ उसकी व्यवहारिकता और उपयोगिता के पहलुओं पर भी विस्तार से विचार किया जाना चाहिए अन्यथा कार्य या योजना के तकनीकी दृष्टि से पूर्ण होने पर भी अव्यवहारिक या अनुपयोगी होने की स्थिति में असफलता ही हाथ लगती है। तकनीकी दृष्टि से पूर्ण किन्तु अव्यवहारिक या अनुपयोगी कार्य या योजना से जन, धन और समय की बर्बादी होने के साथ-साथ साख भी गिरती है।

Wednesday, July 8, 2015

योग के लिए आदतों में संतुलन जरूरी : Balance in habits, a need for Yoga

मित्रो !

          श्रीमद भगवद गीता (GITA) मात्र एक धार्मिक ग्रन्थ ही नहीं है। इसमें व्यवहारिक जीवन किस तरह जिया जाय से सम्बंधित ज्ञान भी दिया गया है। इस कारण यह (श्रीमद भगवद गीता) केवल हिंदुओं के लिए ही उपयोगी नहीं बल्कि समस्त  मानव जाति के लिए कल्याणकारी है।  इसके अध्याय 6 के श्लोक 17 में भगवान श्री कृष्ण द्वारा  अर्जुन को संबोधित करते हुए कहा गया है -
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा।।

        जो (व्यक्ति) खाने, सोने, आमोद-प्रमोद तथा काम करने की आदतों में नियमित रहता है, वह योगाभ्यास द्वारा समस्त भौतिक क्लेशों को नष्ट कर सकता है।