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Saturday, October 14, 2017

क्या आपने कभी सोचा है? : Have You Ever Thought?

मित्रो !
        जब जब हम मन, बुद्धि और शरीर से किसी क्रिया को बार-बार करते हैं तब कुछ समय बाद हम उस क्रिया को करने के अभ्यस्त हो जाते हैं और उसके बाद उस क्रिया को करने के लिए हमें सोचना - विचारना नहीं पड़ता। विचारणीय यह है कि हम अपने व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?
व्यक्तित्व के ऐसे कुछ क्षेत्र निम्नप्रकार हो सकते हैं 
        क्रोध पर नियंत्रण, हनशीलता, मृदु भाषण, जरूरतमंदों की सहायता, अहिंसा, दया भाव, आपसी सहयोग, क्षमा, सदभावना, आभार, सत्य भाषण, समयनिष्ठा, ईमानदारी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आदि। 
(जिस क्रम में क्षेत्र / गुण अंकित किये गए हैं, वे महत्ता प्रदर्शित नहीं करते।
                When we do any act repeatedly applying our mind, intellect and body, we become accustomed of doing it and thereafter, we can perform such act without much thinking. The question is that why we do not apply this aspect for development of our personality?
Few such aspects / fields of our personality may be as follows:

                Control over anger, Tolerance, Soft speech, Help to needy, Non-violence, Compassion, Mutual co-operation, Forgiveness, Harmony, Gratitude, Truth, Punctuality, Honesty, Cleanliness, Environment protection, etc. (Aspects mentioned here are not in any specific order).


Saturday, October 15, 2016

क्या आपने कभी सोचा है? : Have You Ever Thought?

मित्रो !
          जब हम मन, बुद्धि और शरीर से किसी क्रिया को बार-बार करते हैं तब कुछ समय बाद हम उस क्रिया को करने के अभ्यस्त हो जाते हैं और उसके बाद उस क्रिया को करने के लिए हमें सोचना - विचारना नहीं पड़ता। विचारणीय यह है कि हम अपने व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?
          व्यक्तित्व के ऐसे कुछ क्षेत्र निम्नप्रकार हो सकते हैं 
क्रोध पर नियंत्रण, सहनशीलता, मृदु भाषण, जरूरतमंदों की सहायता, अहिंसा, दया भाव, आपसी सहयोग, क्षमा, सदभावना, आभार, सत्य भाषण, समयनिष्ठा, ईमानदारी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आदि।
(जिस क्रम में क्षेत्र / गुण अंकित किये गए हैं, वे महत्ता प्रदर्शित नहीं करते।)
 
       When we do any act repeatedly applying our mind, intellect and body, we become accustomed of doing it and thereafter, we can perform such act without much thinking. The question is that why we do not apply this aspect for development of our personality?
       Few such aspects / fields of our personality may be as follows:

Control over anger, Tolerance, Soft speech, Help to needy, Non-violence, Compassion, Mutual co-operation, Forgiveness, Harmony, Gratitude, Truth, Punctuality, Honesty, Cleanliness, Environment protection, etc.


 

Friday, November 21, 2014

समयनिष्ठा : Punctuality

         जीवन में अनेक कार्य हमें निश्चित समय पर पूरे करने होते हैं। हमें दैनिक जीवन में अनेक प्रयजनों से प्रायः किसी स्थान पर पूर्व निर्धारित समय पर पहुंचना होता है। निर्धारित समय पर कार्य पूरा न करने अथवा निर्धारित समय पर गंतव्य पर न पहुंचने से हमें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। विलम्ब के अनेक संभावित अज्ञात कारणों के अतिरिक्त एक मूल कारण यह भी हो सकता है कि हम भूल जाएँ कि : -
        किसी भी गंतव्य पर पूर्व निर्धारित समय पर पहुँचने के लिए यात्रा प्रारम्भ किये जाने के समय का पूर्व निर्धारण किया जाना और ऐसे निर्धारित समय पर यात्रा प्रारम्भ किया जाना आवश्यक होता है। यात्रा प्रारम्भ करने के समय का निर्धारण करते समय हमें उन कारणों का भी ध्यान रखना होता है जो यात्रा समय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। जहां यात्रा प्रारम्भ करने का समय किसी पूर्व-वर्ती कार्य के समाप्त होने पर निर्भर करता है वहां पूर्व-वर्ती कार्य के समाप्त होने का समय भी निर्धारित किया जाना आवश्यक होता है। किसी कार्य के पूर्व निर्धारित समय पर पूरा किये जाने के मामले में भी यही सब लागू होता है।
        यहां पर मैं अपने को स्पष्ट करने के लिए आपका परिचय एक काल्पनिक करेक्टर "मिस्टर एक्स" से करा रहा हूँ। 
1. मिस्टर एक्स जिस दिन वह अपने विद्यार्थी जीवन की आखिरी परीक्षा दे रहे थे उस दिन परीक्षा सुरू होने के 25 मिनट बाद परीक्षा केंद्र पर पहुंचे। तीन घंटे की जगह ढाई घंटे ही मिले। परिणाम यह हुआ कि 6 प्रश्नों की जगह 5 प्रश्नों का ही उत्तर लिख सके। परिणाम यह हुआ कि 5 अंकों के कम रह जाने से प्रथम श्रेणी की जगह द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।
2. मिस्टर एक्स को एक प्राइवेट जॉब के लिए साक्षात्कार का बुलावा मिला। उस दिन दुर्भाग्य से मिस्टर एक्स को समय पर टैक्सी नहीं मिली और समय से न पहुँचने पर इंटरव्यू नहीं दे सके। 
3. मिस्टर एक्स ने नौकरी के लिए प्रतियोगिता परीक्षा का आवेदन पात्र भरा किन्तु परीक्षा वाले दिन रास्ते पर लम्बा जाम लगे होने के कारन परीक्षा केंद्र पर डेढ़ घंटे देर से पहुंचे। परीक्षा शर्तों के अनुसार वे परीक्षा नहीं दे सके। अगले वर्ष पुनः परीक्षा देने का निर्णय लिया।
4. मिस्टर एक्स अगले वर्ष प्रतियोगिता परीक्षा में बैठे और नौकरी भी पा गए। किन्तु शायद ही कोई दिन हो जिस दिन वे समय पर कार्यालय पहुंचते हों। एक दिन उच्चाधिकारी ने आकश्मिक निरीक्षण प्रातः 10:30 बजे किया। मिस्टर एक्स अनुपस्थित मिले। इस पर उच्चाधिकारी ने चेतावनी दे दी कि अगर ऐसा ही रहा तब उन्हें समयनिष्ठा के विन्दु पर प्रतिकूल प्रवृष्टि दे दी जायेगी। 
5. मिस्टर एक्स कार्यालय देर से पहुँचाने का दोष पत्नी पर मढ़ देते हैं कि उनके ब्रेकफास्ट या लंच बॉक्स देर से देने से वे कार्यालय के लिए लेट हो जाते हैं। इससे घर का माहौल ख़राब रहने लगा है। 
6. मिस्टर एक्स ने बच्चों की गर्मियों की छुट्टी में उनको हिल स्टेशन ले जाने का प्रोग्राम बनाया। रेलवे से आरक्षण भी करवाया किन्तु जिस दिन जाना था, रेलवे स्टेशन पर जब पहुंचे ट्रेन जा चुकी थी। प्रोग्राम रद्द करना पड़ा। बच्चे भी उनसे खिन्न रहने लगे हैं।

        अन्य लोगों के साथ भी ऐसा हो सकता है। उनके न चाहते हुए भी विलम्ब होता हो। इसका कारण क्या हो सकता है। हो सकता है कि इस बीमारी से छुटकारा पाने का आपका कोई अन्य सुझाव हो किन्तु मैं जो कुछ सोच पाया हूँ वह यह है :
किसी कार्य को समय पर पूरा किये जाने के लिए उस कार्य का समय पर शुरू किया जाना भी आवश्यक होता है।