Showing posts with label compassion. Show all posts
Showing posts with label compassion. Show all posts

Thursday, June 28, 2018

राष्ट्र का चरित्र : NATIONAL CHARACTER


मित्रो!
      कभी-कभी यह सोच कर कि हमारे राष्ट्र का चरित्र क्या है और हम जी क्या रहे हैं? दुखी हो जाता हूँ।   धर्म चाहे कोई भी क्यों न हो, हम अपने ईश्वर को करुणा का अवतार (करुणावतारम) मानकर उसकी आराधना करते हैं किन्तु जब करुणा करने की बारी आती है तब हम निर्दयी बन जाते हैं।  क्या यह हमारा दोहरा और संदिग्ध चरित्र नहीं दर्शाता है?
                Sometimes when I think about our national character and the character which we are  living, I become sad. Regardless of our religion, we all worship our God as the incarnation of compassion (Karunavataam), but when it comes to compassion, then we become merciless. Whether this does not reflect our double and dubious character?
मेरा मानना है कि --

      किसी राष्ट्र का चरित्र वह नहीं होता जिसकी अपेक्षा ग्रंथों और धर्म- ग्रंथों में की गयी होती है। किसी राष्ट्र का धर्म वह होता है जो उसमें रहने वाले लोगों के क्रिया-कलापों से परिभाषित होता है।



Saturday, October 14, 2017

क्या आपने कभी सोचा है? : Have You Ever Thought?

मित्रो !
        जब जब हम मन, बुद्धि और शरीर से किसी क्रिया को बार-बार करते हैं तब कुछ समय बाद हम उस क्रिया को करने के अभ्यस्त हो जाते हैं और उसके बाद उस क्रिया को करने के लिए हमें सोचना - विचारना नहीं पड़ता। विचारणीय यह है कि हम अपने व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?
व्यक्तित्व के ऐसे कुछ क्षेत्र निम्नप्रकार हो सकते हैं 
        क्रोध पर नियंत्रण, हनशीलता, मृदु भाषण, जरूरतमंदों की सहायता, अहिंसा, दया भाव, आपसी सहयोग, क्षमा, सदभावना, आभार, सत्य भाषण, समयनिष्ठा, ईमानदारी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आदि। 
(जिस क्रम में क्षेत्र / गुण अंकित किये गए हैं, वे महत्ता प्रदर्शित नहीं करते।
                When we do any act repeatedly applying our mind, intellect and body, we become accustomed of doing it and thereafter, we can perform such act without much thinking. The question is that why we do not apply this aspect for development of our personality?
Few such aspects / fields of our personality may be as follows:

                Control over anger, Tolerance, Soft speech, Help to needy, Non-violence, Compassion, Mutual co-operation, Forgiveness, Harmony, Gratitude, Truth, Punctuality, Honesty, Cleanliness, Environment protection, etc. (Aspects mentioned here are not in any specific order).


Friday, December 16, 2016

प्रेम और करुणा हैं तो जीवन है

  • मित्रो !
    जब तक प्रेम और करुणा (Love and Compassion) इस संसार में शेष हैं, इस संसार में जीवन है। किन्तु बिडम्बना यह है कि इनमें लगातार क्षय हो रहा है जो इस बात का संकेत है कि संसार विनाश की ओर बढ़ रहा है। 
    जरा सोचिये !

Saturday, October 15, 2016

क्या आपने कभी सोचा है? : Have You Ever Thought?

मित्रो !
          जब हम मन, बुद्धि और शरीर से किसी क्रिया को बार-बार करते हैं तब कुछ समय बाद हम उस क्रिया को करने के अभ्यस्त हो जाते हैं और उसके बाद उस क्रिया को करने के लिए हमें सोचना - विचारना नहीं पड़ता। विचारणीय यह है कि हम अपने व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?
          व्यक्तित्व के ऐसे कुछ क्षेत्र निम्नप्रकार हो सकते हैं 
क्रोध पर नियंत्रण, सहनशीलता, मृदु भाषण, जरूरतमंदों की सहायता, अहिंसा, दया भाव, आपसी सहयोग, क्षमा, सदभावना, आभार, सत्य भाषण, समयनिष्ठा, ईमानदारी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आदि।
(जिस क्रम में क्षेत्र / गुण अंकित किये गए हैं, वे महत्ता प्रदर्शित नहीं करते।)
 
       When we do any act repeatedly applying our mind, intellect and body, we become accustomed of doing it and thereafter, we can perform such act without much thinking. The question is that why we do not apply this aspect for development of our personality?
       Few such aspects / fields of our personality may be as follows:

Control over anger, Tolerance, Soft speech, Help to needy, Non-violence, Compassion, Mutual co-operation, Forgiveness, Harmony, Gratitude, Truth, Punctuality, Honesty, Cleanliness, Environment protection, etc.


 

Monday, June 13, 2016

दया क्या है : What is Compassion

मित्रो !
   दीन- दुखी, असहाय अथवा मुसीबत में फंसे किसी प्राणी के प्रति सहानुभूति की भावना ही दया की भावना है और ऐसी भावना के वशीभूत उनमें से किसी पर उसके सहायतार्थ  किया गया उपकार ही दया है। 
 Friends !
          Feeling of sympathy for the poor, helpless or any other living being in distress is the feeling of compassion and any act of benevolence done to help them under the influence of the feeling of compassion is the act of compassion.



Wednesday, June 8, 2016

मनुष्य और पशु में अन्तर : Difference Between Human Being and Animal

Friends !
          Knowledge, self-study, compassion and benevolence make life of a human being better than the life of an animal. Otherwise, life of a man is worse than the life of an animal.

मित्रो !

     स्वाध्याय, ज्ञान, करुणा और परोपकार ही मनुष्य को एक पशु से बेहतर बनाते हैं अन्यथा मनुष्य का जीवन एक पशु के जीवन से भी बदतर है।


Wednesday, May 11, 2016

यह हम कहाँ आ गए हैं?

मित्रो !
     आजकल सभी क्षेत्रों में सामान्य रूप में ऐसा बहुत कुछ असामान्य घटित हो रहा है जो हमें याद दिलाता है कि यह कलियुग है। यहाँ प्यार, सत्य, करुणा, दान और धर्म जैसे तत्व कमजोर हो रहे हैं, उनकी परिभाषाएँ बदल रहीं हैं।

     यहां सत्य से उसके सत्य होने का प्रमाण माँगा जा रहा है, वासना को प्यार का नाम दे दिया गया है, बूढ़े माँ-बाप सहानुभूति के पात्र बन गए हैं, मानवीय रिस्तों का व्यापारीकरण हो गया है। भोलेपन और विश्वास को छला जा रहा है, इनको ब्लैकमेल के लिए प्रयोग किया जा रहा है। कामुक भूखे भेड़िये हर जगह घूम रहे हैं। नदियाँ प्यासीं हैं, हवा, पानी पर पहरे लगे हैं, संख्या बल बढ़ाने को धर्म का सशक्तिकरण माना जा रहा है। संतों का अकाल दिख रहा है, ईश्वर की तिजारत करने वाले बाबाओं की संख्या बढ़ रही है, स्वयं भू ईश्वर अनेक हैं। हमारी धरती जो कभी स्वर्ग तुल्य थी पर बोझ और उसका दोहन इतने बढ़ गए हैं कि वह काँप और कराह रही है। ------- हम भूल गए हैं कि हम लगातार गर्त में गिर रहे हैं।