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Friday, July 20, 2018

गरीब की मदद : HELP OF THE POOR


मित्रो!
     गरीब को उधार देकर उसकी इज्जत, आबरू और जिंदगी का सौदा न करो।  अगर गरीब के लिए कुछ कर सकते हो तब दिल बड़ा रखो, गरीब की मदद करो और भूल जाओ।

     By lending money to the poor, do not deal with his prestige, honor and life. If you can do something for the poor, then have a brave heart, help the poor and forget.




Tuesday, November 22, 2016

असहाय के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें


मित्रो!

जब हमारा कोई परिचित या संबंधी गंभीर अवस्था में अस्वस्थ होता है और उपचार का भी उस पर कोई असर नहीं दिखाई देता। उस समय हम यही सोचते हैं कि काश हम कुछ कर सकते। उस समय हमें एक रास्ता दिखाई देता है, हम उसके लिए ईश्वर से दुआ माँगते हैं कि वह स्वस्थ हो जाय। ऐसे ही हमें चाहिए कि जहां हम किसी गरीब या असहाय की अपने तन, मन या धन से सहायता कर पाने में असमर्थ हों वहां पर हमें उस गरीब या असहाय के लिए ईश्वर से दुआ माँगनी चाहिए। इससे हमारा चरित्र निर्मल होता है।


Monday, June 13, 2016

दया क्या है : What is Compassion

मित्रो !
   दीन- दुखी, असहाय अथवा मुसीबत में फंसे किसी प्राणी के प्रति सहानुभूति की भावना ही दया की भावना है और ऐसी भावना के वशीभूत उनमें से किसी पर उसके सहायतार्थ  किया गया उपकार ही दया है। 
 Friends !
          Feeling of sympathy for the poor, helpless or any other living being in distress is the feeling of compassion and any act of benevolence done to help them under the influence of the feeling of compassion is the act of compassion.



Saturday, May 9, 2015

दया धर्म का मूल है : Compassion, the base of a religion

मित्रो !
किसी अन्य प्राणी को कष्ट में देखने पर उसके कष्ट दूर करने के उद्देश्य से उसकी सहायता करने की जिस इच्छा का मनुष्य के हृदय में जन्म होता है, वह दया या करुणा कहलाती है। गोस्वामी तुलसी दास जी ने राम चरित मानस में एक दोहे में धर्म के मूल के विषय में निम्नप्रकार उल्लेख किया है :

दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान। 

तुलसी दया न छोड़िये जब लगि घट में प्रान ।।
विचारणीय यह है कि यदि दया धर्म का मूल है तब धर्म को स्थायित्व प्रदान करने और सशक्त बनाये जाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति, जो धर्म में विश्वास रखता है अथवा जो धर्म की उन्नति चाहता है अथवा जो अपने को धर्म का रक्षक कहता है, को अपने अन्दर के दया भाव को जागृत कर उसका प्रयोग धर्म की जड़ों के सशक्तिकरण के लिए करना होगा। सभी प्राणियों पर दया करते हुए असहाय दलितों, वंचितों और गरीबों पर विशेष दया दृष्टि से उनका दर्द कम करना होगा। कोरे भाषण देकर धर्म की पैरबी करने, दयनीय जीवन जी रहे लोगों को अल्पकालिक लालच देकर अपने समुदाय में शामिल करने अथवा उनके इर्द-गिर्द पहरेदार (watchmen) खड़े करने से धर्म की जड़ें मजबूत नहीं होंगी।

Compassion, Religion, Base, Foundation, Basis,दया धर्म का मूल है.उपकार।