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Thursday, June 28, 2018

राष्ट्र का चरित्र : NATIONAL CHARACTER


मित्रो!
      कभी-कभी यह सोच कर कि हमारे राष्ट्र का चरित्र क्या है और हम जी क्या रहे हैं? दुखी हो जाता हूँ।   धर्म चाहे कोई भी क्यों न हो, हम अपने ईश्वर को करुणा का अवतार (करुणावतारम) मानकर उसकी आराधना करते हैं किन्तु जब करुणा करने की बारी आती है तब हम निर्दयी बन जाते हैं।  क्या यह हमारा दोहरा और संदिग्ध चरित्र नहीं दर्शाता है?
                Sometimes when I think about our national character and the character which we are  living, I become sad. Regardless of our religion, we all worship our God as the incarnation of compassion (Karunavataam), but when it comes to compassion, then we become merciless. Whether this does not reflect our double and dubious character?
मेरा मानना है कि --

      किसी राष्ट्र का चरित्र वह नहीं होता जिसकी अपेक्षा ग्रंथों और धर्म- ग्रंथों में की गयी होती है। किसी राष्ट्र का धर्म वह होता है जो उसमें रहने वाले लोगों के क्रिया-कलापों से परिभाषित होता है।



Monday, September 19, 2016

स्वभाव में परिवर्तन का कारण क्या है? : Cause of Change in Our Nature


  • मित्रो !
             प्रत्येक व्यक्ति सतो, रजो और तमो, तीन गुणों वाली प्रकृति के साथ जन्म लेता है। मनुष्य के जीवन में जिस क्षण पर जो गुण प्रधान (dominant) होता है, उस क्षण पर वह उसी गुण के अनुरूप कार्य एवं आचरण करता है। 
            मनुष्य खान-पान, रहन-सहन और आचार-विचार में परिवर्तन कर अपनी प्रकृति में इच्छानुसार किसी भी गुण की प्रधानता को बढ़ा सकता है। अच्छी और बुरी संगति के प्रभाव से भी गुण (सतो गुण, रजो गुण और तमो गुण) प्रभावित होते हैं। कभी-कभी कटु बचनों से भी गुणों की प्रधानता में अचानक परिवर्तन हो जाता है। गुणों में परिवर्तन के कारण ही लुटेरे बाल्मीकि महर्षि बाल्मीकि बने और उन्होंने हिन्दुओं के धार्मिक ग्रन्थ रामायण की रचना की। नारी आकर्षण से ग्रस्त तुलसी दास के अंदर पत्नी द्वारा कही गयी बातों से गुणों में परिवर्तन हुआ और वे गोस्वामी तुलसी दास कहलाये तथा उन्होंने पवित्र ग्रन्थ राम चरित मानस की रचना की। आचरण द्वारा तामसी प्रवृत्ति रखने वाला व्यक्ति सात्विकी प्रकृति का व्यक्ति बन जाता है।
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Sunday, February 14, 2016

चरित्र निर्माण की कठिन डगर : Difficult Path of Character Building


मित्रो !
चरित्र निर्माण के पथ पर मिलने वाले आकर्षण मनुष्य की बुद्धि को भ्रमित करने का कार्य करते हैं। चरित्र साधना में लगे व्यक्ति को चाहिए कि वह इनकी अनदेखी कर आगे बढ़ जाय। जो व्यक्ति ऐसा नहीं करता वह पथ से भटक जाता है, समाज में प्रतिष्ठा खो देता है और चरित्र की अपनी अर्जित पूँजी भी खो देता है।


Wednesday, June 3, 2015

दोहरा चरित्र Dual Character

मित्रो !
दो बच्चों के माँ बाप होकर हम सभी अपने दोनों बच्चों से अपेक्षा करते हैं कि हमारे दोनों बच्चे मिल-जुल कर रहे और आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करें किन्तु विडम्बना यह है कि हम में से अनेक लोग अपने भाई से मिल-जुल कर नहीं रहना चाहते। क्या ऐसा करके हम अपने माँ-बाप का दिल नहीं दुखाते हैं? हम दोहरा चरित्र क्यों जीते हैं?
Dual Character


मृत्यु उपरान्त चरित्र हनन : Character Assassination After Death


मित्रो !
किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका चरित्र हनन कायरता तो है ही साथ ही ऐसा करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत भी है। कायरता इसलिए कि ऐसा करना पीछे से वार करने और मरे हुए को मारने जैसा है और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत इसलिए कि मरा हुआ व्यक्ति आरोप के सम्बन्ध में अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सकता।

मेरे विचार से यह कार्य घृणित और निंदनीय है। ऐसे कृत्य की जितनी भी निन्दा की जाय वह कम है।