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Sunday, May 29, 2016

वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य धर्म : Globally Acceptable Religion

मित्रो !

     वस्तुतः मानवता ही ऐसा धर्म है जो विभिन्न धर्मों के अनुयायियों को एक सूत्र में बाँध सकता है। मेरा मानना है कि विभिन्न धर्मों के रहते विश्व स्तर पर मानवता को द्वितीयक अनिवार्य धर्म घोषित किये जाने और ऐसे धर्म की शिक्षा को अनिवार्य होने की सहमति बनायीं जानी चाहिए। 
        Humanity is indeed the only religion which can bind followers of all religions in a single thread. I am of the view that various religions remaining in existence, global consent should be developed for declaring "Humanity" as secondary mandatory religion and to make its education compulsory.




 

Friday, May 20, 2016

जनसँख्या बृद्धि दर अधिक होने के कारण : Reasons for Higher Growth Rate of Population

मित्रो !
       अधिक संतानें पैदा करने या जनसँख्या की बृद्धि दर अधिक होने के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं :-
() अज्ञान
() अशिक्षा
() आर्थिक कमजोरी (बेरोजगारी)
() असुरक्षा की भावना। 
    मेरा विचार है कि जनसँख्या की बृद्धि दर पर नियंत्रण पाने के लिए योजनायें इन कारणों को ध्यान में रख कर बनायीं जानीं चाहिए। 
   कारण और भी हैं जिनका उल्लेख मैं यहां करना उचित नहीं समझता। इनका उल्लेख मैं आगे आने वाली किसी पोस्ट में करूँगा।


Tuesday, May 17, 2016

कम या अधिक संतानें पैदा करने से - किसी का धर्म तो नहीं छिन जाता

मित्रो !
     भले ही किसी धर्म में अधिक संख्या में बच्चे पैदा करने की बात कही गयी हो, पर मैंने नहीं देखा कि किसी भी धर्म के किसी ऐसे अनुयायी दंपत्ति, जिसने कम संख्या में बच्चे पैदा किये हों, को धर्म और समाज से इसी आधार पर बहिष्कृत कर दिया गया हो अथवा कम बच्चे पैदा करने के कारण उस पर कोई आसमानी आफत टूट पड़ी हो।

     उलटे जिन लोगों ने कम बच्चे पैदा किये हैं, वह उन लोगों से हर मायने में बेहतर जिंदगी जी रहे हैं जिन्होंने अधिक संख्या में बच्चे पैदा किये हैं। जिन्होंने संतानों के मामले में अपना परिवार सीमित रखा है उनकी खुशहाली और तरक्की हुयी है, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़े हैं, वहीँ पर जिन्होंने अधिक बच्चे पैदा करने की नीति अपनाई है, पीढ़ी दर पीढ़ी संसाधनों के बंटने से कमजोर होते चले गए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ गए हैं और उन्हें बेरोजगारी की समस्या से जूझना पड़ रहा है।