Wednesday, April 29, 2015

जीवन-दर्शन पर विज्ञान की विजय

अनुरोध :
ऐसे मित्रों जिनको मानव मस्तिष्क में पायी जाने वाली चेतना (Consciousness) की जानकारी नहीं हैं उनसे मेरा अनुरोध है कि वे कृपया इस पोस्ट को पढ़ने से पूर्व मेरी Timeline पर उपलब्ध पोस्ट जिसका शीर्षक "पंच तत्व मिलि बना शरीरा" है को पढ़ने का कष्ट करें। 
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मित्रो ! 

जिस क्षण विज्ञान यह जान लेगा कि प्रकृति में पाये जाने वाले अथवा मानव शरीर में विद्यमान या उत्पन्न होने वाले अथवा वैज्ञानिक विधि से बनाये जा सकने वाले ऐसे कौन से तत्व या पदार्थ हैं जो मनुष्य की चेतना में होने वाली क्रियायों के लिए उत्तरदायी हैं?; चेतना में होने वाली क्रियाओं और उनकी तीब्रता पर नियंत्रण कैसे रखा जा सकता है? तथा शरीर पर समय के प्रभाव को निष्क्रिय कर चेतना को शरीर से कैसे बांधे रखा जा सकता है? वह क्षण जीवन-दर्शन पर विज्ञान की विजय का क्षण होगा।

यदि ऐसा हुआ तब -
बलबान और धनबान मनुष्य सभी प्रकार के संतापों से मुक्ति पा लेंगे। भय समाप्त हो जायेगा, मृत्यु का भी भय नहीं रहेगा। मनुष्य इच्छानुसार जीवन जियेगा। ऐसी उपलब्धि "मोक्ष" से भी बड़ी होगी। समाज में व्यवस्था समाप्त हो जाएगी क्योकि गलत कार्यों के करने पर भी भय नहीं रहेगा।

किन्तु विज्ञान द्वारा ऐसी उपलब्धियां प्राप्त किया जाना संभव नहीं है क्योकि जड़ (निर्जीव) से चेतन (सजीव) की उत्पत्ति संभव नहीं हैं। मानव का पुतला बना सकते हैं, रोबोट बना सकते हैं किन्तु इनमें चेतना पैदा नहीं कर सकते। मृत शरीर में चेतना नहीं डाल सकते। चिकित्सा विज्ञान काफी आगे बढ़ा है, उसने मस्तिष्क के उस भाग का पता कर लिया है जहाँ चेतना से सम्बंधित क्रियाएँ जन्म लेतीं हैं किन्तु इन क्रियाओं के होने के कारण का ज्ञान नहीं हो सका है। चेतना जैसा कोई अंग, तत्व या पदार्थ भी नहीं मिला है।

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