Thursday, April 30, 2015

भोजन का उपयुक्त समय

मित्रो !
तन और मन स्वस्थ रखने के लिए भोजन की नियमित रूप से आवश्यकता होती है। यह ध्यान देने योग्य है कि कुसमय लिया गया रुचिकर भोजन भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता जबकि समय पर लिया गया रूखा-सूखा भोजन भी अच्छा होता है। समय से भोजन न लिए जाने से हमारे आमाशय में अम्ल की अधिकता हो जाती है जिससे स्वास्थ्य ख़राब होता है। खाए जा रहे भोजन को पचाने के लिए भोजन लेते समय हमारे आमाशय के अंदर आवश्यक शक्ति की जठराग्नि भी होनी चाहिए अन्यथा भोजन पचने के बजाय पेट में सड़ने लगेगा। मन्द जठराग्नि होने पर कब्ज, गैस, अम्लता बढ़ेगी और अनेक प्रकार के विषाक्त
पदार्थ (toxins) बनेंगे जो शरीर को हानि पहुँचायेंगे। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि भोजन दिन के ऐसे समय लिया जाय जब हमारे आमाशय में जठराग्नि उचित मात्रा में उपलब्ध रहती है। 
आयुर्वेद के अनुसार हमारे भारत जैसे देश में दिन के 24 घंटे में तीन बार भोजन लिया जाना पर्याप्त होता है। सुबह का नास्ता (breakfast) सूर्योदय (sunrise) होने के ढाई घंटे के अंदर, दोपहर का भोजन (lunch) मध्यान्ह में, सामान्यतः 1 से 3 बजे के मध्य, और शाम का भोजन (supper) सूर्यास्त (sunset) से ठीक पूर्व लिया जाना उपयुक्त माना गया है। इन समयों पर हमारे आमाशय में उचित मात्रा में जठराग्नि उपलब्ध रहती है। सूर्यास्त के बाद अगली प्रातः सूर्योदय होने के बीच जठराग्नि मन्द रहती है। अतः सूर्यास्त के बाद अगली प्रातः सूर्योदय होने के बीच के समय में लिया गया भोजन ठीक से नहीं पचता। 
भोजन की कितनी मात्रा होनी चाहिए, इस सम्बन्ध में कहा गया है कि हमारा नास्ता अच्छी मात्रा में दोपहर में लिए जाने वाले भोजन की मात्रा के लगभग बराबर या उससे थोड़ा ही कम होना चाहिए। चार बिस्किट और एक कप कॉफी या चाय ले ली, यह सुबह का नास्ता बिलकुल नहीं है। शाम को लिए जाने वाले भोजन की मात्रा दोपहर में लिए गए भोजन की दो-तिहाई (two-third) होनी चाहिए। अगर सूर्यास्त के समय शाम का भोजन लिया जाना संभव नहीं है तब शाम का भोजन सोने से दो-तीन घंटे पूर्व अवश्य लिया जाना चाहिए। दिन भर में लिए जाने वाले भोजन की कुल मात्रा इतनी होनी चाहिए जिससे आपकी कार्य प्रकृति को देखते हुए आवश्यक कैलोरीज मिल जांय। शाम के खाने के कम से कम एक घंटे बाद एक गिलास गरम दूध लेना स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है। 
जो व्यक्ति दिन में दो ही बार भोजन करते हैं उन्हें सुबह और शाम को भोजन करना चाहिए किन्तु दोपहर में कुछ अल्पाहार अवश्य करना चाहिए। सुबह का भोजन प्रातः 9 बजे तक और शाम का भोजन यदि सूर्यास्त के लगभग लेना संभव न हो तब सोने से लगभग दो - ढाई घंटे पूर्व अवश्य ले लेना चाहिए।



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